संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ‘प्रकृति के लिए वित्त की स्थिति 2026’ रिपोर्ट पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के रिश्ते को समझने में महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य संदेश यह है कि दुनिया भर में प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों में जाने वाला धन, प्रकृति की रक्षा और बहाली के लिए किए जाने वाले निवेश से कहीं अधिक है। 2023 में प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों में 7.3 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का वित्तीय प्रवाह हुआ, जबकि प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए केवल 220 अरब अमेरिकी डॉलर मिले। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने इस अंतर को लगभग 30:1 बताया है।

प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाले वित्त में ऐसी सार्वजनिक सब्सिडी और निजी निवेश शामिल हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जलवायु लक्ष्यों को नुकसान पहुँचाते हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, 2023 में इन वित्तीय प्रवाहों में पर्यावरण के लिए हानिकारक सार्वजनिक सब्सिडी के लगभग 2.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर और निजी पूंजी के 4.9 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर शामिल थे। निजी पूंजी मुख्यतः सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, उद्योग, ऊर्जा और बुनियादी सामग्री से जुड़े क्षेत्रों में गई। इसके विपरीत, प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए मिले 220 अरब अमेरिकी डॉलर में से करीब 90% सार्वजनिक स्रोतों से आया, जबकि निजी वित्त केवल लगभग 23.4 अरब अमेरिकी डॉलर था।

परीक्षा की दृष्टि से यह रिपोर्ट अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और वैश्विक शासन के आपसी संबंधों को समझने में उपयोगी है। RAS और UPSC में इससे जैव विविधता वित्त, जलवायु परिवर्तन, सब्सिडी सुधार, हरित निवेश और सतत विकास पर प्रश्न बन सकते हैं। स्थिर सामान्य ज्ञान में इसका संबंध पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं, प्रकृति-आधारित समाधानों और जैव विविधता संरक्षण से है। रिपोर्ट वित्तीय प्रवाहों की दिशा बदलने पर ज़ोर देती है, क्योंकि जैव विविधता, जलवायु और भूमि-बहाली के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2030 तक प्रकृति-आधारित समाधानों में सालाना निवेश बढ़ाकर 571 अरब अमेरिकी डॉलर करना होगा। इसलिए यह केवल पर्यावरण से जुड़ी चेतावनी नहीं है; यह बजट, निवेश के विकल्पों और नीति-निर्माण से जुड़ा शासन का सवाल भी है।