भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार, गंभीर रूप से संकटग्रस्त लेसर फ्लोरिकन (सिफियोटाइडिस इंडिकस) की वैश्विक आबादी घटकर केवल 150-200 रह गई है। यह 1982 में दर्ज 4,374 पक्षियों की तुलना में 80% की गिरावट है। 2025 के प्रजनन मौसम में गुजरात और राजस्थान में केवल 19 नर पक्षी देखे गए।

राजस्थान के अजमेर में बंदी प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ इस समय 10 पक्षी हैं। लेसर फ्लोरिकन भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक पक्षी है और ऐतिहासिक रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के घास के मैदानों में पाया जाता रहा है। कृषि विस्तार और घास के मैदानों में पवन टर्बाइन लगाने से आवास का नष्ट होना इस प्रजाति के लिए प्रमुख खतरा है।