प्रकाशित: 23 अक्टूबर 2025राजस्थान
लेसर फ्लोरिकन की संख्या 150-200 तक गिरी; अजमेर में बंदी प्रजनन केंद्र
भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार, गंभीर रूप से संकटग्रस्त लेसर फ्लोरिकन (सिफियोटाइडिस इंडिकस) की वैश्विक आबादी घटकर केवल 150-200 रह गई है। यह 1982 में दर्ज 4,374 पक्षियों की तुलना में 80% की गिरावट है। 2025 के प्रजनन मौसम में गुजरात और राजस्थान में केवल 19 नर पक्षी देखे गए।
राजस्थान के अजमेर में बंदी प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ इस समय 10 पक्षी हैं। लेसर फ्लोरिकन भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक पक्षी है और ऐतिहासिक रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के घास के मैदानों में पाया जाता रहा है। कृषि विस्तार और घास के मैदानों में पवन टर्बाइन लगाने से आवास का नष्ट होना इस प्रजाति के लिए प्रमुख खतरा है।
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लेसर फ्लोरिकन (सिफियोटाइड्स इंडिकस), जिसकी आबादी 150-200 व्यक्तियों तक गिर गई है, का बंदी प्रजनन केंद्र राजस्थान के किस शहर में स्थापित किया गया है?
व्याख्या · सही उत्तर Cलेसर फ्लोरिकन के लिए एक कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर अजमेर, राजस्थान में स्थापित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 10 पक्षी हैं। लेसर फ्लोरिकन भारतीय उपमहाद्वीप की एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय बस्टर्ड प्रजाति है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेसर फ्लोरिकन की मौजूदा आबादी कितनी है और बंदी प्रजनन केंद्र कहाँ है?
भारत में **लेसर फ्लोरिकन** की आबादी घटकर केवल **150-200 पक्षी** रह गई है। प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षण देकर विलुप्त होने से बचाने के लिए **अजमेर, राजस्थान** में **बंदी प्रजनन केंद्र** स्थापित किया गया है।
IUCN रेड लिस्ट में लेसर फ्लोरिकन की स्थिति क्या है?
**लेसर फ्लोरिकन (सिफियोटाइडिस इंडिकस)** को IUCN रेड लिस्ट में **'गंभीर रूप से संकटग्रस्त'** प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भारत में इसकी अनुमानित वन्य आबादी केवल 150-200 पक्षी है, इसलिए यह दुनिया की सबसे अधिक संकटग्रस्त बस्टर्ड प्रजातियों में से एक है।
लेसर फ्लोरिकन के संरक्षण के लिए राजस्थान क्यों महत्वपूर्ण है?
**राजस्थान**, खास तौर पर ताल छापर वन्यजीव अभयारण्य और बाड़मेर तथा जोधपुर जिलों के घास के मैदान, भारत में लेसर फ्लोरिकन के **मुख्य प्रजनन आवास** हैं। अजमेर का बंदी प्रजनन केंद्र वन्य संरक्षण के प्रयासों को सहारा देने के लिए बनाया गया है।
लेसर फ्लोरिकन के अस्तित्व के लिए प्रमुख खतरे क्या हैं?
**लेसर फ्लोरिकन** के प्रमुख खतरों में **घास के मैदानों को कृषि भूमि में बदलना, अत्यधिक चराई और कीटनाशकों का उपयोग** शामिल हैं। कीटनाशकों से उसके भोजन का स्रोत बनने वाले कीड़े मरते हैं। बिजली की तारों से टकराव और शिकार भी इसके लिए खतरा हैं। मानसून के समय और प्रजनन चक्र में असंगति से भी इसकी प्रजनन सफलता प्रभावित हुई है।
अजमेर में लेसर फ्लोरिकन के बंदी प्रजनन कार्यक्रम का लक्ष्य क्या है?
**अजमेर में बंदी प्रजनन कार्यक्रम** का लक्ष्य नियंत्रित वातावरण में लेसर फ्लोरिकन का प्रजनन कराना, जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए चूजों को पालना और अंततः बंदी प्रजनन से तैयार पक्षियों को संरक्षित प्राकृतिक आवासों में फिर से छोड़ना है। इससे घटती वन्य आबादी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।