प्रकाशित: 22 अक्टूबर 2025राजस्थान
लेसर फ्लोरिकन की संख्या 150-200 तक गिरी; अजमेर में बंदी प्रजनन केंद्र
भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन के अनुसार, गंभीर रूप से संकटग्रस्त लेसर फ्लोरिकन (Sypheotides indicus) की वैश्विक संख्या घटकर 150-200 रह गई है — 1982 में 4,374 से 80% से अधिक गिरावट। 2025 के प्रजनन मौसम में गुजरात और राजस्थान में केवल 19 नर देखे गए।
राजस्थान के अजमेर में बंदी प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 10 पक्षी हैं। लेसर फ्लोरिकन भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक पक्षी है, जो राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के घास के मैदानों में पाया जाता है। कृषि विस्तार और पवन टरबाइन लगाने से आवास का नुकसान इसका प्रमुख खतरा है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
लेसर फ्लोरिकन (सिफियोटाइड्स इंडिकस), जिसकी आबादी 150-200 व्यक्तियों तक गिर गई है, का बंदी प्रजनन केंद्र राजस्थान के किस शहर में स्थापित किया गया है?
व्याख्या · सही उत्तर Cलेसर फ्लोरिकन के लिए एक कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर अजमेर, राजस्थान में स्थापित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 10 पक्षी हैं। लेसर फ्लोरिकन भारतीय उपमहाद्वीप की एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय बस्टर्ड प्रजाति है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेसर फ्लोरिकन की वर्तमान जनसंख्या स्थिति क्या है और ब्रीडिंग सेंटर कहाँ है?
**लेसर फ्लोरिकन** की जनसंख्या भारत में घटकर गंभीर रूप से केवल **150-200 व्यक्तियों** तक रह गई है। प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए **अजमेर, राजस्थान** में एक **कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर** स्थापित किया गया है।
लेसर फ्लोरिकन की IUCN स्थिति क्या है?
**लेसर फ्लोरिकन** (Sypheotides indicus) को IUCN रेड लिस्ट में **'संकटग्रस्त'** के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भारत में इसकी अनुमानित वन्य जनसंख्या केवल 150-200 पक्षी है।
लेसर फ्लोरिकन संरक्षण के लिए राजस्थान क्यों महत्वपूर्ण है?
**राजस्थान** — विशेष रूप से ताल छापर वन्यजीव अभयारण्य और बाड़मेर और जोधपुर जिलों की घासभूमियाँ — भारत में लेसर फ्लोरिकन का **मुख्य प्रजनन आवास** हैं।
लेसर फ्लोरिकन के अस्तित्व के लिए मुख्य खतरे क्या हैं?
**लेसर फ्लोरिकन** के मुख्य खतरों में **घास के मैदानों को कृषि भूमि में बदलना, अत्यधिक चराई, कीटनाशकों का उपयोग**, जिससे उसके भोजन का स्रोत बनने वाले कीड़े मर जाते हैं, बिजली लाइनों से टकराव और शिकार शामिल हैं।
अजमेर में लेसर फ्लोरिकन कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम का लक्ष्य क्या है?
**अजमेर में कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम** का लक्ष्य नियंत्रित वातावरण में लेसर फ्लोरिकन का प्रजनन कराना, जीवित रहने की दर सुधारने के लिए चूजे पालना और अंततः घटती जंगली आबादी को बढ़ाने के लिए **कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को संरक्षित जंगली आवासों में फिर से छोड़ना** है।