प्रकाशित: 21 जनवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
नागौरी अश्वगंधा को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला — राजस्थान का 22वाँ GI प्रमाणित उत्पाद नागौर जिले की कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती देगा
Aसीधा उत्तर
केंद्र सरकार ने 7 जनवरी 2026 को 'नागौरी अश्वगंधा' को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया, जिससे यह राजस्थान का 22वाँ GI-प्रमाणित उत्पाद बन गया। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में नागौर जिला अपनी शुष्क जलवायु और बलुई मिट्टी के कारण अश्वगंधा की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। यहां की अश्वगंधा अन्य क्षेत्रों की तुलना में लंबी, मोटी और औषधीय यौगिकों, विशेषतः एल्केलॉइड्स और विदानोलाइड्स, से भरपूर जड़ें देती है। GI टैग 'नागौरी अश्वगंधा' नाम को कानूनी सुरक्षा देता है, ताकि कोई भी व्यक्ति या संगठन घरेलू या वैश्विक बाजारों में इसका दुरुपयोग न कर सके। इससे नागौर जिले के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने और जड़ी-बूटी आधारित औषधियों तथा न्यूट्रास्युटिकल्स के वैश्विक बाजारों में निर्यात क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। सोजत मेहंदी (पाली जिले) के बाद, यह राजस्थान की कृषि श्रेणी में दूसरी बड़ी GI उपलब्धि है। भारत में GI टैगिंग प्रणाली भौगोलिक संकेत वस्तुएं (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के DPIIT के अंतर्गत भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा प्रशासित की जाती है।
केंद्र सरकार ने 7 जनवरी 2026 को नागौरी अश्वगंधा को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया। इससे यह राजस्थान का 22वां GI टैग वाला उत्पाद बन गया। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में नागौर जिला अपनी शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी के कारण अश्वगंधा की खेती के लिए खास तौर पर उपयुक्त है। यहां की अश्वगंधा में दूसरे क्षेत्रों की उपज की तुलना में जड़ें लंबी, मोटी और औषधीय यौगिकों - विशेष रूप से एल्कलॉइड्स और विथानोलाइड्स - से अधिक समृद्ध होती हैं।
विथानोलाइड की मात्रा अश्वगंधा का प्रमुख सक्रिय औषधीय घटक है, जो इसे इसके प्रसिद्ध एडाप्टोजेनिक और औषधीय गुण देता है। GI टैग नागौरी अश्वगंधा नाम को कानूनी सुरक्षा देता है। इससे घरेलू और वैश्विक बाजारों में इस नाम के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा, मिलावट पर अंकुश लगेगा और उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित रहेगी।
इस प्रमाणन से नागौर जिले के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने और वैश्विक हर्बल चिकित्सा तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजारों में अश्वगंधा की निर्यात क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। सोजत मेहंदी (पाली जिले से) के बाद यह कृषि श्रेणी में राजस्थान की दूसरी प्रमुख GI उपलब्धि है। राजस्थान के अन्य GI टैग वाले उत्पादों में बीकानेर भुजिया, मकराना मार्बल, कोटा डोरिया, सांगानेर ब्लॉक प्रिंट, जोधपुरी मोजड़ी और जयपुर की ब्लू पॉटरी शामिल हैं।
भारत में GI टैगिंग प्रणाली वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के DPIIT के अंतर्गत भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा संचालित की जाती है। यह मान्यता राजस्थान के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है, जो पारंपरिक कृषि-ज्ञान को आधुनिक बौद्धिक संपदा संरक्षण से जोड़ती है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
राजस्थान के 22वें GI-प्रमाणित उत्पाद के रूप में किस उत्पाद को GI टैग मिला?
व्याख्या · सही उत्तर Bनागौरी अश्वगंधा को राजस्थान के 22वें GI-प्रमाणित उत्पाद के रूप में GI टैग मिला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नागौरी अश्वगंधा को GI टैग कब मिला और राजस्थान के लिए इसका क्या महत्व है?
नागौरी अश्वगंधा को 7 जनवरी 2026 को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला, जिससे यह राजस्थान का 22वाँ GI-प्रमाणित उत्पाद बन गया। यह टैग घरेलू और वैश्विक बाजारों में नाम के दुरुपयोग से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और वैश्विक हर्बल मेडिसिन व न्यूट्रास्युटिकल उद्योग में निर्यात बढ़ाने में सहायक होगा।
नागौर जिला अश्वगंधा की खेती के लिए क्यों विशेष रूप से उपयुक्त है?
राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में नागौर जिले की शुष्क जलवायु और बलुई मिट्टी के कारण अश्वगंधा की ऐसी जड़ें विकसित होती हैं जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में लंबी, मोटी और औषधीय यौगिकों, विशेषतः एल्केलॉइड्स और विदानोलाइड्स, से भरपूर होती हैं।
भारत में GI टैग किस कानून और प्राधिकरण के तहत दिए जाते हैं?
भारत में भौगोलिक संकेत (GI) टैग भौगोलिक संकेत वस्तुएँ (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत, वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा दिए जाते हैं।
नागौरी अश्वगंधा से पहले राजस्थान का प्रमुख कृषि GI उत्पाद कौन सा था?
पाली जिले की सोजत मेहंदी राजस्थान की कृषि श्रेणी में पहली बड़ी GI उपलब्धि थी, जो 7 जनवरी 2026 को नागौरी अश्वगंधा को GI टैग मिलने से पहले की प्रमुख उपलब्धि थी।
नागौरी अश्वगंधा को विशेष रूप से मूल्यवान बनाने वाला प्रमुख औषधीय यौगिक कौन सा है?
विदानोलाइड्स प्रमुख औषधीय यौगिक हैं, जो नागौरी अश्वगंधा को विशेष रूप से मूल्यवान बनाते हैं। नागौर की शुष्क, बलुई मिट्टी में उगाई गई जड़ों में अन्य क्षेत्रों में उगाई गई अश्वगंधा की तुलना में विदानोलाइड्स और एल्केलॉइड्स की मात्रा काफी अधिक होती है।