मकर संक्रांति 2026 में सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:13 बजे होता है। हालांकि स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सबसे शुभ पुण्य काल मुहूर्त 15 जनवरी को सूर्योदय से दोपहर 1:00 बजे तक रहेगा। यह त्योहार पूरे भारत में गुजरात में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी और राजस्थान में उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है। राज्य सरकारों ने अलग-अलग अवकाश अधिसूचनाएं जारी कीं: उत्तर प्रदेश ने परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के तहत 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। मकर संक्रांति सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक है, जो शुभ मास, फसल उत्सव और पतंगबाजी परंपराओं का शुभारंभ करती है।
मकर संक्रांति 2026: सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, पुण्य काल 14–15 जनवरी
मकर संक्रांति 2026 में सूर्य 14 जनवरी को 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा, पुण्य काल 15 जनवरी को। पूरे भारत में पोंगल, लोहड़ी और उत्तरायण के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक है।
मुख्य तथ्य
- मकर संक्रांति 2026 में सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करता है।
- इस संक्रांति के दौरान शुभ पुण्य काल 15 जनवरी को पड़ता है।
- यह पर्व उत्तरायण — सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा — की शुरुआत का प्रतीक है।
- इसे तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है।
- मकर संक्रांति सौर कैलेंडर पर आधारित कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है।
- यह पर्व फसल कटाई के मौसम का प्रतीक है और दान व सामुदायिक भोज से जुड़ा है।
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मकर संक्रांति 2026 पर सूर्य देव किस राशि में प्रवेश कर गए?
मकर संक्रांति 2026 सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है, जो 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:13 बजे हुआ। यह उत्तरायण अर्थात सूर्य की उत्तर दिशा में यात्रा का प्रतीक है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में सूर्य मकर राशि में कब प्रवेश करेगा और पुण्य काल कब होगा?
2026 में सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस संक्रांति का शुभ पुण्य काल 15 जनवरी को होगा।
मकर संक्रांति भारत के विभिन्न राज्यों में किन नामों से जानी जाती है?
मकर संक्रांति तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण के नाम से मनाई जाती है। यह सौर कैलेंडर पर आधारित कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है।
मकर संक्रांति का खगोलीय महत्व क्या है?
मकर संक्रांति उत्तरायण, यानी उत्तर दिशा में सूर्य की गति, की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ता है। इसके बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और कृषि महत्व क्या है?
मकर संक्रांति भारत के कई हिस्सों में फसल की कटाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है और यह दान, सामुदायिक भोज तथा पतंगबाजी से जुड़ी है। यह समृद्धि और फसल के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।
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