संविधान की 12वीं अनुसूची के अनुसार नगर नियोजन राज्य सरकारों और शहर के स्तर पर शहरी स्थानीय निकायों या शहरी विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार योजनाओं, सलाह, दिशा-निर्देशों, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग से इन कोशिशों को आगे बढ़ाती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 2019 में दिशा-निर्देश जारी कर शहरों से गर्मी के प्रति अपनी संवेदनशीलता जाँचने, शहरी ऊष्मा द्वीप बढ़ाने वाले प्रमुख कारण पहचानने और लू कार्ययोजनाओं में उचित बचाव के उपाय जोड़ने को कहा। अब तक 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों ने ऐसी कार्ययोजनाएँ तैयार की हैं। असंगठित कामगारों के लिए जारी एक अलग सलाह में छायादार फेरी क्षेत्र, पेयजल, शीतलन केंद्र, काम के लचीले घंटे और गर्मी की समय पर चेतावनी जैसे उपाय सुझाए गए हैं।
दिल्ली की राज्य जलवायु कार्ययोजना 2.0 के संशोधन के तहत किए गए आकलन में भारत मौसम विज्ञान विभाग के 1991-2020 के आँकड़े और जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की छठी आकलन रिपोर्ट के परिदृश्य लिए गए। इसके अनुसार सदी के मध्य तक गर्मियों का अधिकतम तापमान सामाजिक-आर्थिक पथ 2-4.5 में लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस और पथ 5-8.5 में 2.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। बहुत गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ने का अनुमान है। दक्षिण दिल्ली को सबसे अधिक और नई दिल्ली को सबसे कम जलवायु-संवेदनशील जिला माना गया। सुझाए गए उपायों में ठंडी छतें, शीतल गलियारे, अधिक शहरी हरियाली, आर्द्रभूमि और जल निकायों का पुनरुद्धार, मजबूत वर्षाजल निकासी, गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य निगरानी और आपात व्यवस्था शामिल हैं।
भारत शीतलन कार्ययोजना का लक्ष्य टिकाऊ शीतलन, शीतलन की कम माँग, बेहतर ऊर्जा दक्षता और उन्नत तकनीकी विकल्प हैं। अमृत और अमृत 2.0 के तहत 11,119 एकड़ में 3,458 पार्क परियोजनाएँ विकसित हुई हैं और 18,535 एकड़ में फैली 1,104 जल निकाय परियोजनाएँ पूरी हुई हैं। 473 किमी क्षेत्र वाली 346 हरित आवागमन परियोजनाएँ भी पूरी हो चुकी हैं। 99 लाख एलईडी सड़क-बत्तियों से हर साल 665 करोड़ किलोवाट-घंटा बिजली बचती है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 46 लाख टन घटा है। अमृत 2.0 ने 12 शहरों में शहरी गर्मी घटाने के वैज्ञानिक आकलन की प्रायोगिक पहल भी शुरू की है।
