केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 25 सितंबर 2025 को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी यानी जेएनपीए के न्हावा शेवा वितरण टर्मिनल पर बदली जा सकने वाली बैटरी वाले भारत के पहले इलेक्ट्रिक भारी ट्रक बेड़े को रवाना किया। यह पहल बंदरगाहों पर साफ ऊर्जा, माल-ढुलाई और तकनीक के उपयोग को जोड़ती है। शुरुआती बेड़े में 50 इलेक्ट्रिक भारी ट्रक शामिल हैं और इसे 2025 के अंत तक 80 ट्रकों तक बढ़ाने की योजना बताई गई है।
जेएनपीए का बड़ा लक्ष्य 2026 तक अपने 600 ट्रकों के बेड़े के 90% हिस्से को ईवी में बदलना है। इस लक्ष्य के पूरा होने पर यह किसी भारतीय बंदरगाह पर सबसे बड़ा ईवी ट्रक बेड़ा होगा। बदली जा सकने वाली बैटरी का महत्व इसलिए है कि ट्रक लंबी चार्जिंग रुकावट के बजाय बैटरी बदलकर काम जारी रख सकते हैं। बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में, जहां भारी माल की आवाजाही लगातार चलती है, यह परिचालन समय और ईंधन-आधारित प्रदूषण जैसे मुद्दों से सीधे जुड़ता है। इसलिए यह केवल वाहन बदलने की खबर नहीं, बल्कि बंदरगाहों की रोज़मर्रा की माल-ढुलाई को साफ ऊर्जा से जोड़ने वाला उदाहरण भी है।
परीक्षा में इस खबर से जेएनपीए का स्थान, 50 से 80 ट्रकों तक विस्तार, 2026 तक 600 ट्रकों के 90% हिस्से को ईवी में बदलने का लक्ष्य और बदली जा सकने वाली बैटरी की उपयोगिता याद रखनी चाहिए। स्टैटिक जीके में इसे प्रमुख बंदरगाहों, हरित माल-ढुलाई, ईवी नीति, बदली जा सकने वाली बैटरी के मॉडल और सार्वजनिक अवसंरचना में ऊर्जा संक्रमण से जोड़ा जा सकता है। प्रीलिम्स में स्थान, संस्था, तकनीक और लक्ष्य पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में बंदरगाह आधुनिकीकरण, स्वच्छ परिवहन और जलवायु-अनुकूल आर्थिक विकास के उदाहरण के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।
