राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में फिशिंग कैट, जिसका वैज्ञानिक नाम प्रियोनैलुरस विवेरिनस है, पहली बार देखी गई। यह रिकॉर्ड रामगढ़ रेंज में नियमित बाघ निगरानी के दौरान कैमरा ट्रैप में मिला। रिजर्व के जीवविज्ञानी और दलेलपुरा निगरानी टीम ने इसे दर्ज किया, जिससे यह रिजर्व की छोटी बिल्ली प्रजातियों की सूची में महत्वपूर्ण जोड़ बन गई।

फिशिंग कैट आमतौर पर नदी किनारे और आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी मानी जाती है। इसी कारण रामगढ़ विषधारी में इसका मिलना राजस्थान के पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी तथ्य बनता है। परीक्षा की दृष्टि से इसे राजस्थान-विशेष समसामयिकी, जैव विविधता, संरक्षित क्षेत्र, आर्द्रभूमि आधारित आवास और प्रजाति संरक्षण के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बूंदी जिले में है और 2022 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, इसलिए यह तथ्य राजस्थान के संरक्षित क्षेत्रों वाले स्टैटिक जीके से भी जुड़ता है।

फिशिंग कैट भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची 1 संरक्षित प्रजाति है और आईयूसीएन रेड लिस्ट में संवेदनशील श्रेणी में सूचीबद्ध है। इसलिए इसका इस तरह पहली बार दर्ज होना संरक्षण, आवास की स्थिति और निगरानी तंत्र तीनों पहलुओं से महत्वपूर्ण है। इससे अभ्यर्थी टाइगर रिजर्व को केवल बाघ संरक्षण नहीं, बल्कि व्यापक जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में भी पढ़ सकते हैं। प्रीलिम्स में स्थान, प्रजाति, संरक्षण-स्थिति और कैमरा ट्रैप से जुड़ा सीधा प्रश्न पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में इसे राजस्थान में जैव विविधता संरक्षण और टाइगर रिजर्व के व्यापक पारिस्थितिक महत्व के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।