जयपुर विश्व का पहला ऐसा शहर बन गया है जहाँ तीन समर्पित तेंदुआ सफारी हैं। 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर बीड पापड़ तेंदुआ सफारी (विद्याधर नगर) के उद्घाटन के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई। तीन तेंदुआ सफारी — झालाना, अमागढ़ और बीड पापड़ — ऐतिहासिक शहर के भीतर शहरी वन्यजीव संरक्षण का अनूठा मॉडल प्रस्तुत करती हैं। झालाना लेपर्ड रिजर्व, शहरी सीमाओं के भीतर लगभग 23 वर्ग किलोमीटर में फैला, भारत का पहला शहरी तेंदुआ अभयारण्य था — 2017 में राजस्थान वन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त। इसमें 30-35 तेंदुए हैं, जिनमें से 8-10 नियमित रूप से सफारी क्षेत्र में दिखते हैं। 2025 में झालाना में 30,000 से अधिक और अमागढ़ में 8,000 से अधिक पर्यटक आए। दिसंबर-जनवरी सबसे व्यस्त मौसम है। जयपुर में तेंदुआ सफारी के साथ शेर, हाथी और बाघों वाला जैविक पार्क मिलकर शहर को 'भारत की वन्यजीव राजधानी' के रूप में स्थापित करते हैं। इस मॉडल का अध्ययन दिल्ली के असोला भट्टी और मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान जैसे अन्य भारतीय शहरों के लिए उदाहरण के रूप में किया जा रहा है।
तीन तेंदुआ सफारी वाला विश्व का पहला शहर बना जयपुर; राजस्थान के शहरी वन गलियारों में वन्यजीव पर्यटन बढ़ा
जयपुर विश्व का पहला ऐसा शहर बन गया है जहाँ तीन समर्पित तेंदुआ सफारी हैं। 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) पर बीड पापड़ तेंदुआ सफारी (विद्याधर नगर) के उद्घाटन के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई। तीन तेंदुआ सफारी — **झालाना, अमागढ़ और बीड पापड़** — एक ऐतिहासिक शहर के भीतर शहरी वन्यजीव संरक्षण का अनूठा मॉडल प्रस्तुत करती हैं। झालाना लेपर्ड रिजर्व, शहरी सीमा के भीतर लगभग 23 वर्ग किलोमीटर में फैला है और भारत का पहला शहरी तेंदुआ अभयारण्य था, जिसे 2017 में राजस्थान वन विभाग ने मान्यता दी। इसमें 30-35 तेंदुए हैं, जिनमें से 8-10 नियमित रूप से सफारी क्षेत्र में दिखते हैं। 2025 में झालाना में 30,000 से अधिक और अमागढ़ में 8,000 से अधिक पर्यटक आए। दिसंबर-जनवरी सबसे अधिक पर्यटकों वाला मौसम है। जयपुर का तेंदुआ सफारी पारिस्थितिकी तंत्र — शेर, हाथी और बाघों वाले जैविक पार्क के साथ — शहर को 'भारत की वन्यजीव राजधानी' के रूप में स्थापित कर चुका है। इस मॉडल का अध्ययन दिल्ली के असोला भट्टी और मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान जैसे अन्य भारतीय शहरों के लिए उदाहरण के रूप में किया जा रहा है।
मुख्य तथ्य
- 5 जून 2025 को बीड पापड़ सफारी खुलने के बाद जयपुर तीन तेंदुआ सफारियों वाला विश्व का पहला शहर बना।
- तीन सफारी — झालाना, अमागढ़ और बीड पापड़ — सभी शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र की सीमाओं में स्थित हैं।
- झालाना लेपर्ड रिजर्व शहर के भीतर 23 वर्ग किमी में फैला है और यहाँ 30-35 तेंदुए रहते हैं।
- 2025 में झालाना में 30,000 से अधिक और अमागढ़ में 8,000 से अधिक पर्यटक आए।
- जयपुर के शहरी वन्यजीव मॉडल को अन्य भारतीय शहरों के लिए उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
- वन्यजीव पर्यटन स्थानीय गाइडों, परिवहन, होटलों और कारीगरों को आय प्रदान करता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: झालाना, अमागढ़ और बीड पापड़ तेंदुआ सफारी के साथ जयपुर के विश्व के प्रथम तीन-तेंदुआ-सफारी शहर बनने का शहरी वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यटन विविधीकरण मॉडल के रूप में विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) को विद्याधर नगर में बीड पापड़ तेंदुआ सफारी के उद्घाटन के साथ जयपुर तीन तेंदुआ सफारी (झालाना, अमागढ़, बीड पापड़) वाला विश्व का पहला शहर बना। झालाना के 23 वर्ग किमी रिज़र्व में 30-35 तेंदुए; 2025 में 30,000 से अधिक पर्यटक, अमागढ़ 8,000 से अधिक; शहरी पर्यटन विविधीकरण।
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जून 2025 में जयपुर में खोली गई बीड़ पापड़/मैला बाग तेंदुआ सफारी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
बीड़ पापड़/मैला बाग तेंदुआ सफारी जून 2025 में जयपुर के नाहरगढ़ क्षेत्र में पर्यटकों के लिए खोली गई। झालाना और आमागढ़ के बाद इससे जयपुर में तीसरा समर्पित तेंदुआ-सफारी क्षेत्र जुड़ा, जिससे शहर का शहरी वन्यजीव-पर्यटन सर्किट मजबूत हुआ।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व का पहला ऐसा कौन-सा शहर बना जहाँ तेंदुओं के लिए तीन विशेष सफारी हैं?
राजस्थान का जयपुर विश्व का पहला ऐसा शहर बना जहाँ तेंदुओं के लिए तीन विशेष सफारी हैं। 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस पर विद्याधर नगर में बीड पापड़ तेंदुआ सफारी के उद्घाटन के बाद यह उपलब्धि प्राप्त हुई। ये तीन सफारी हैं — झालाना, अमागढ़ और बीड पापड़।
झालाना लेपर्ड रिजर्व का क्षेत्रफल कितना है और यहाँ कितने तेंदुए रहते हैं?
झालाना लेपर्ड रिजर्व जयपुर शहर की सीमाओं के भीतर लगभग 23 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहाँ 30–35 तेंदुए रहते हैं। यह भारत का पहला शहरी तेंदुआ अभयारण्य था जिसे 2017 में राजस्थान वन विभाग ने मान्यता दी थी।
बीड पापड़ तेंदुआ सफारी का उद्घाटन कब और जयपुर के किस क्षेत्र में हुआ?
बीड पापड़ तेंदुआ सफारी का उद्घाटन 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) को जयपुर के विद्याधर नगर क्षेत्र में हुआ। इसके खुलने से जयपुर तीन तेंदुआ सफारी वाला विश्व का पहला शहर बन गया।
2025 में झालाना और अमागढ़ सफारी में कितने पर्यटक आए?
2025 में झालाना लेपर्ड रिजर्व में 30,000 से अधिक और अमागढ़ में 8,000 से अधिक पर्यटक आए। ये आंकड़े जयपुर के शहरी वन गलियारों में वन्यजीव पर्यटन के बढ़ते महत्व को दिखाते हैं।
जयपुर का शहरी वन्यजीव मॉडल अन्य भारतीय शहरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
जयपुर में शहर की सीमाओं के भीतर तेंदुए के आवास बचाए रखने का मॉडल अन्य भारतीय शहरों के लिए उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इससे पता चलता है कि शहरी विकास और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सकता है।
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