सितंबर 2025 में भारत के सात प्राकृतिक विरासत स्थल यूनेस्को की विश्व विरासत स्थलों की संभावित सूची में शामिल किए गए। इससे इस सूची में भारत की प्रविष्टियां 62 से बढ़कर 69 हो गईं। नए स्थल हैं: महाराष्ट्र में पंचगनी और महाबलेश्वर स्थित डेक्कन ट्रैप, कर्नाटक में सेंट मैरी द्वीप समूह की भूवैज्ञानिक विरासत, मेघालय में मेघालय युग की गुफाएं, नागालैंड की नागा हिल ओफियोलाइट, आंध्र प्रदेश में एर्रा मट्टी डिब्बालु, आंध्र प्रदेश में तिरुमाला पहाड़ियों की प्राकृतिक विरासत और केरल में वरकला चट्टानें।

इस अपडेट का महत्व केवल सूची बढ़ने तक सीमित नहीं है। यूनेस्को के प्रोटोकॉल के तहत किसी स्थल को विश्व विरासत सूची के लिए नामित करने से पहले उसका संभावित सूची में होना आवश्यक है। इसलिए यह कदम भविष्य के नामांकन की तैयारी माना जाता है। भारत के पास अब यूनेस्को द्वारा विचाराधीन कुल 69 स्थल हैं, जिनमें 49 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक और 3 मिश्रित विरासत स्थल शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत की ओर से विश्व विरासत सम्मेलन के लिए नोडल एजेंसी है और उसने इन नामांकनों को संकलित कर प्रस्तुत करने में भूमिका निभाई।

परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय पर्यावरण, भारत का भूगोल, भू-आकृति विज्ञान, विरासत संरक्षण और समसामयिकी को जोड़ता है। डेक्कन ट्रैप लावा प्रवाहों से, सेंट मैरी द्वीप समूह स्तंभाकार बेसाल्टिक चट्टानों से, मेघालय युग की गुफाएं जलवायु और भूवैज्ञानिक बदलावों से, नागा हिल ओफियोलाइट महासागरीय परत और टेक्टोनिक प्रक्रियाओं से, एर्रा मट्टी डिब्बालु तटीय भू-आकृति विज्ञान से, तिरुमाला पहाड़ियां एपार्चियन अनकन्फॉर्मिटी और सिलाथोरनम से, तथा वरकला चट्टानें तटीय अपरदन और वर्कल्ली संरचना से जुड़ी हैं। RAS, UPSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न स्थान का राज्य से मिलान, प्राकृतिक विरासत, संरक्षण और स्टैटिक जीके लिंक के रूप में पूछे जा सकते हैं।