दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को 2017 उन्नाव बलात्कार मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित कर दी और अपील लंबित रहने तक स्वास्थ्य के आधार पर सशर्त राहत दी। तब तक वह छह वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिता चुके थे। 20 मार्च 1966 को जन्मे सेंगर को 2019 में दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में उनके निवास पर 2017 में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। उन्होंने अपील लंबित रहने के दौरान सज़ा निलंबित करने की मांग की थी। पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मृत्यु होने और 2019 में ट्रक से हुई टक्कर में पीड़िता के गंभीर रूप से घायल होने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस आदेश की निंदा की। 29 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के 23.12.2025 के आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि इसके आधार पर सेंगर को रिहा न किया जाए।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2017 उन्नाव बलात्कार मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दी
दिल्ली HC ने 2017 उन्नाव बलात्कार मामले में छह वर्ष की हिरासत के बाद कुलदीप सेंगर को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी।
मुख्य तथ्य
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित कर दी और 2017 उन्नाव बलात्कार मामले में उनकी अपील लंबित रहने तक सशर्त राहत दी।
- सेंगर को 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में उनके निवास पर 2017 में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी।
- सेंगर को स्वास्थ्य के आधार पर यह राहत दी गई; तब तक वह छह वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिता चुके थे।
- पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई थी और 2019 में ट्रक से हुई टक्कर में पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
- महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने आदेश की निंदा की और 29 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने इस पर रोक लगाकर सेंगर को रिहा न करने का निर्देश दिया।
6-अक्ष वर्गीकरण
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2025 में कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दी। उन्हें किस वर्ष दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई थी?
कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में विशेष CBI अदालत ने 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दिसंबर 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत दी थी, लेकिन प्रश्न में पूछा गया दोषसिद्धि और सजा का वर्ष 2019 ही है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2017 उन्नाव बलात्कार मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया और यह क्यों महत्वपूर्ण था?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित कर दी और 2017 उन्नाव बलात्कार मामले में उनकी अपील लंबित रहने तक स्वास्थ्य के आधार पर सशर्त राहत दी। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि सेंगर को 2019 में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी और बाद में उच्चतम न्यायालय ने इस राहत पर रोक लगाकर उन्हें रिहा न करने का निर्देश दिया।
कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली राहत से जुड़े प्रमुख तथ्य क्या थे?
20 मार्च 1966 को जन्मे सेंगर को 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में उनके निवास पर 2017 में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी। छह वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिताने के बाद उन्हें अपील लंबित रहने तक स्वास्थ्य के आधार पर सशर्त राहत मिली।
कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत से जुड़े मामले में कौन-कौन से प्राधिकरण और पक्ष शामिल थे?
इस मामले के प्रमुख पक्षों में सशर्त राहत देने वाला दिल्ली उच्च न्यायालय, उस आदेश पर रोक लगाने वाला उच्चतम न्यायालय, कुलदीप सिंह सेंगर, पीड़िता और उनका परिवार तथा आदेश की निंदा करने वाले महिला अधिकार संगठन शामिल थे।
कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत से जुड़े मामले में कौन-सी तिथियाँ और आँकड़े प्रमुख हैं?
यह मामला 2017 में हुए बलात्कार, 2019 में सेंगर को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सज़ा दिए जाने, छह वर्ष से अधिक समय हिरासत में रहने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर 2025 के आदेश और 29 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय द्वारा उस आदेश पर रोक लगाने से जुड़ा था। सेंगर की दर्ज जन्मतिथि 20 मार्च 1966 है।
कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली राहत पर व्यापक प्रतिक्रिया क्या रही?
पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मृत्यु होने और 2019 में ट्रक से हुई टक्कर में पीड़िता के गंभीर रूप से घायल होने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। महिला अधिकार संगठनों ने उच्च न्यायालय की राहत की निंदा की और उच्चतम न्यायालय ने उस पर रोक लगाकर सेंगर को रिहा न करने का निर्देश दिया।
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