प्रकाशित: 25 अक्टूबर 2025टॉपिक
गृह मंत्रालय ने बोडो समुदाय के बाथौ धर्म के लिए अलग जनगणना कोड मंजूर किया
गृह मंत्रालय (MHA) ने बोडो समुदाय के पारंपरिक बाथौ धर्म के लिए अलग जनगणना कोड बनाने की मंजूरी दी, जिससे अगली जनगणना में बाथौ आस्था को 'अन्य धर्म' में शामिल करने के बजाय अलग से दर्ज किया जाएगा।
बोडो असम का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है और बाथौ उनका स्वदेशी धर्म है, जिसमें बाथौ ब्वराई (सर्वोच्च देवता) की पूजा मुख्य है। यह निर्णय बोडो समुदाय की लंबे समय की मांग पूरी करता है और जनवरी 2020 में केंद्र, असम सरकार और बोडो संगठनों के बीच हस्ताक्षरित बोडो शांति समझौते का हिस्सा था। भारत की जनगणना वर्तमान में छह धर्मों — हिंदू, इस्लाम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन — को एक अवशिष्ट श्रेणी के साथ मान्यता देती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MHA ने बोडो समुदाय के बाथु धर्म के बारे में क्या निर्णय लिया?
**गृह मंत्रालय (MHA)** ने असम के **बोडो समुदाय** के पारंपरिक **बाथु धर्म** के लिए अलग जनगणना कोड मंजूर किया। अगली जनगणना में बाथु धर्म को अलग से दर्ज किया जाएगा।
बोडो लोग कौन हैं और बाथौ ब्वराई कौन हैं?
**बोडो लोग** **असम का सबसे बड़ा जनजातीय समूह** हैं। वे **बाथु (बाथौ) धर्म** मानते हैं जो **बाथौ ब्वराई** (सर्वोच्च देवता) की पूजा पर केंद्रित है। MHA ने उनके धर्म को अलग जनगणना कोड दिया।
बोडो शांति समझौता क्या था और इस पर कब हस्ताक्षर हुए?
**बोडो शांति समझौते** पर केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो संगठनों के बीच **जनवरी 2020** में हस्ताक्षर हुए। इसकी एक प्रमुख शर्त **बाथु धर्म** को अलग जनगणना कोड देना था।
अगली भारतीय जनगणना में बाथु धर्म को कैसे वर्गीकृत किया जाएगा?
MHA की मंजूरी के बाद, बोडो समुदाय का **बाथु धर्म** अगली जनगणना में **अलग से** दर्ज होगा। इसे 'अन्य धर्म और पंथ' की अवशिष्ट श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
बोडो समुदाय के लिए अलग जनगणना कोड क्यों महत्वपूर्ण है?
**बाथु धर्म** के लिए अलग जनगणना कोड बोडो लोगों की **अनूठी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान** को मान्यता देता है और **2020 के बोडो शांति समझौते** की प्रमुख माँग को पूरा करता है।