राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ी यह नियुक्ति स्थानीय स्वशासन और चुनावी प्रशासन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी राजेश्वर सिंह को राजस्थान का नया मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। उन्होंने मधुकर गुप्ता का स्थान लिया। राजेश्वर सिंह के पास भारतीय प्रशासनिक सेवा में 35 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव है, इसलिए यह नियुक्ति सिर्फ पद पर नए व्यक्ति के आने की बात नहीं है, बल्कि पंचायत और नगरपालिका चुनावों की निगरानी से जुड़े संवैधानिक पद पर नई जिम्मेदारी का मामला भी है।

राज्य निर्वाचन आयोग का काम राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से कराना है। पंचायत चुनावों के लिए संविधान का अनुच्छेद 243-K राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार कराने और चुनाव कराने के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण की शक्ति देता है। नगरपालिका चुनावों के लिए अनुच्छेद 243-ZA यही भूमिका राज्य निर्वाचन आयोग से जोड़ता है। इसलिए RAS और UPSC में इससे स्थानीय निकाय चुनावों की संवैधानिक निगरानी, राज्य निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और अनुच्छेद 243-K/243-ZA के प्रयोग पर प्रश्न बन सकते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य बात यह है कि भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग अलग-अलग संवैधानिक व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। भारत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से जुड़ा है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों से जुड़ा है। राजस्थान के संदर्भ में नए मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से कराने से जुड़ी रहेगी। प्रारंभिक परीक्षा में नियुक्ति, पद और अनुच्छेद पूछे जा सकते हैं; मुख्य परीक्षा में स्थानीय स्वशासन और चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता पर इसका उपयोग किया जा सकता है।