प्रकाशित: 1 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतपर्यावरण
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान — सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' विषय पर 50वीं वर्षगांठ मनाई गई; भारत के रामसर स्थलों की संख्या 98
2 फरवरी 2026 को 50वां विश्व आर्द्रभूमि दिवस 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' विषय पर वैश्विक स्तर पर मनाया गया। इस विषय के ज़रिए आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में स्वदेशी और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की कालजयी भूमिका को रेखांकित किया गया। वैश्विक समारोह रोम, इटली में खाद्य और कृषि संगठन के मुख्यालय में आयोजित किया गया, जो 1971 में अपनाए गए रामसर कन्वेंशन की इटली द्वारा पुष्टि की 50वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाता है।
भारत के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता था: ठीक दो दिन पहले 31 जनवरी 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) और छारी-ढांड (कच्छ, गुजरात) को भारत की रामसर सूची में जोड़ा था, जिससे देश में रामसर-नामित आर्द्रभूमियों की कुल संख्या 98 हो गई — 2014 के बाद 276% की वृद्धि।
राजस्थान में सांभर नमक झील — भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारी झील और एक रामसर स्थल — का गहरा सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व है। स्थानीय समुदाय ऐतिहासिक रूप से नमक उत्पादन, राजहंस अवलोकन और मौसमी मछली पकड़ने में शामिल रहे हैं। जोहड़, बावड़ी और नाड़ी जैसी स्वदेशी जल संरक्षण प्रणालियों से जल संचयन का पारंपरिक ज्ञान राजस्थान के शुष्क परिदृश्य के आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र से अटूट रूप से जुड़ा है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के महत्व तथा राजस्थान के संदर्भ में आर्द्रभूमि संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
2 फरवरी 2026 को एफएओ रोम में 50वां विश्व आर्द्रभूमि दिवस 'आर्द्रभूमि एवं पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत' विषय पर मनाया गया; दो दिन पूर्व 31 जनवरी को भारत ने पटना पक्षी अभयारण्य एवं छाड़ी-ढांड जोड़कर रामसर सूची 98 तक पहुंचाई। राजस्थान की सांभर झील, जोहड़ एवं बावड़ी स्वदेशी संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजअंतरराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतसमाचार स्रोत
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नआसान
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 पर रामसर कन्वेंशन के कितने वर्ष मनाए गए?
व्याख्या · सही उत्तर Dविश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1971 में रामसर कन्वेंशन अपनाया गया था। 2026 में इस कन्वेंशन के 55 वर्ष पूरे हुए, 50 वर्ष नहीं; इसलिए विकल्प D सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 का विषय क्या था और यह किस महत्वपूर्ण उपलब्धि से जुड़ा था?
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 का विषय 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान — सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' था। यह 2 फरवरी 1971 को अपनाए गए रामसर कन्वेंशन की 50वीं वर्षगांठ पर मनाया गया।
2026 की शुरुआत तक भारत में कितने रामसर स्थल हैं?
31 जनवरी 2026 को नए स्थल जोड़े जाने के बाद भारत की रामसर स्थलों की संख्या 98 हो गई है। भारत एशिया में रामसर के रूप में नामित सबसे अधिक आर्द्रभूमियों वाले देशों में से एक है।
राजस्थान की कौन-सी आर्द्रभूमि रामसर स्थल है और राज्य की पारंपरिक जल संरक्षण प्रथाएं क्या हैं?
राजस्थान की सांभर झील रामसर स्थल के रूप में नामित आर्द्रभूमि है। राज्य जोहड़ (सामुदायिक तालाब) और बावड़ी (सीढ़ीदार कुएं) जैसी पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों के लिए भी जाना जाता है, जो 2026 के विश्व आर्द्रभूमि दिवस के विषय में रेखांकित स्वदेशी ज्ञान का उदाहरण हैं।
रामसर कन्वेंशन क्या है और आर्द्रभूमि संरक्षण में इसका क्या महत्व है?
रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर में हस्ताक्षरित एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमि का संरक्षण और सतत उपयोग है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (रामसर स्थलों) को नामित किया जाता है और हस्ताक्षरकर्ता देश उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के विषय के संदर्भ में जोहड़ और बावड़ी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जोहड़ (सामुदायिक तालाब) और बावड़ी (सीढ़ीदार कुएं) राजस्थान में स्थानीय समुदायों द्वारा बनाई गई पारंपरिक जल संचयन और संरक्षण संरचनाएं हैं। ये सतत जल प्रबंधन में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो 2026 के विश्व आर्द्रभूमि दिवस के विषय का मुख्य आधार है।