11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने वाराणसी के नमो घाट से भारत के पहले पूरी तरह स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत को रवाना किया। यह भारत के हरित समुद्री क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह पोत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने विकसित किया है और इसे अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1), यानी गंगा नदी पर संचालित करता है। मुख्य तकनीकी विशेषताएं: यह पोत 50 वातानुकूलित यात्रियों को ले जा सकता है, लो-टेम्परेचर PEM (प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन) फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करता है, एक हाइड्रोजन रिफिल पर लगभग 8 घंटे चल सकता है और केवल पानी उत्सर्जित करता है। इससे गंगा पर नौवहन पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त हो जाता है। यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023, 2030 तक 5 MMT उत्पादन लक्ष्य) और हरित नौका पहल के अनुरूप है। IWAI राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्गों का प्रबंधन करता है। गंगा — NW-1 — 1,620 किमी (इलाहाबाद-हल्दिया) के साथ सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग है।

अतिरिक्त संदर्भ: 11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने वाराणसी के नमो घाट से भारत के पहले पूरी तरह स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत को रवाना किया। यह भारत के हरित समुद्री क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह पोत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने विकसित किया है और इसे अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1), यानी गंगा नदी पर संचालित करता है। मुख्य तकनीकी विशेषताएं: यह पोत 50 वातानुकूलित यात्रियों को ले जा सकता है, लो-टेम्परेचर PEM (प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन) फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करता है, एक हाइड्रोजन रिफिल पर लगभग 8 घंटे चल सकता है और केवल पानी उत्सर्जित करता है। इससे गंगा पर नौवहन पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त हो जाता है। यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023, 2030 तक 5 MMT उत्पादन लक्ष्य) और हरित नौका पहल के अनुरूप है। IWAI राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्गों का प्रबंधन करता है। गंगा — NW-1 — 1,620 किमी (इलाहाबाद-हल्दिया) के साथ सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग है। मुख्य पहलू: भारत का पहला स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत 11 दिसंबर 2025 को वाराणसी में शुरू हुआ। यह पोत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा विकसित और IWAI द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) पर संचालित है। इसमें लो-टेम्परेचर PEM फ्यूल सेल तकनीक है और यह केवल पानी उत्सर्जित करता है — शून्य प्रदूषण। पोत 50 यात्रियों को वातानुकूलन सहित ले जाता है और एक रिफिल पर 8 घंटे चलता है। यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2030 तक 5 MMT लक्ष्य) के अनुरूप है। IWAI राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्गों का प्रबंधन करता है। सामान्य प्रश्न: भारत के पहले स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत का निर्माण किस संस्था ने किया? इस पोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने किया, जिसे अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर संचालित किया जाता है। भारत का पहला हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत कब और कहाँ से रवाना किया गया? यह पोत 11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा वाराणसी के नमो घाट से रवाना किया गया। हाइड्रोजन पोत में कौन-सी फ्यूल सेल तकनीक प्रयुक्त होती है और यह क्या उत्सर्जित करता है? पोत में लो-टेम्परेचर PEM (प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन) फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग होता है और यह केवल जल उत्सर्जित करता है — यह पूर्णतः शून्य प्रदूषण वाहन है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल पोत की यात्री क्षमता और एक रिफिल पर संचालन अवधि क्या है? यह पोत वातानुकूलन सहित 50 यात्रियों को ले जा सकता है और एक हाइड्रोजन रिफिल पर 8 घंटे तक संचालित हो सकता है। यह पोत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से किस प्रकार जुड़ा है? यह पोत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देता है, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख मेट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन करना है।