प्रकाशित: 23 अक्टूबर 2025समाचार स्रोतटॉपिक
भारतीय सेना ने 4.25 लाख स्वदेशी CQB कार्बाइन के लिए ₹2,700 करोड़ का अनुबंध किया
भारतीय सेना ने आत्मनिर्भर भारत रक्षा विनिर्माण पहल के तहत 4.25 लाख नज़दीकी लड़ाई वाली कार्बाइन खरीदने के लिए लगभग ₹2,700 करोड़ का अनुबंध किया है। यह खरीद पैदल सेना के छोटे हथियारों के आधुनिकीकरण से जुड़ी है, क्योंकि ऐसी कार्बाइन सीमित जगहों, शहरी कार्रवाई, आतंकवाद-रोधी अभियानों और इमारतों की तलाशी जैसी स्थितियों में उपयोगी मानी जाती हैं।
अनुबंध में आपूर्ति का बंटवारा साफ है। भारत फोर्ज की कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स 2.5 लाख कार्बाइन देगी, जो कुल खरीद का 60% हिस्सा है। अदाणी पीएलआर सिस्टम्स, जो अदाणी समूह और इज़राइल वेपन इंडस्ट्रीज़ का संयुक्त उद्यम है, 1.75 लाख कार्बाइन देगी, यानी 40% हिस्सा। आपूर्ति सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
परीक्षा की तैयारी के लिहाज़ से यह अपडेट रक्षा, विज्ञान-तकनीक, शासन और आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा है। प्रीलिम्स में अनुबंध की राशि, 4.25 लाख की संख्या, 60:40 आपूर्तिकर्ता बंटवारा और सितंबर 2026 की आपूर्ति-समयसीमा पूछी जा सकती है। मुख्य परीक्षा में इसे रक्षा खरीद, स्वदेशी विनिर्माण, आयात-निर्भरता घटाने और सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। RAS, UPSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में यह तथ्यात्मक याददाश्त के साथ नीति-आधारित उत्तर लेखन के लिए भी उपयोगी है। स्थिर जीके से इसका संबंध भारतीय सेना के पैदल सेना आधुनिकीकरण, रक्षा औद्योगिक आधार और आत्मनिर्भर भारत नीतिगत ढांचे से बनता है। यह छोटा अपडेट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक साथ परिचालन जरूरत, घरेलू उत्पादन और रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका दिखाई देती है।
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भारतीय सेना और नौसेना के Rs 2,770 करोड़ के CQB कार्बाइन अनुबंध के तहत, 4.25 लाख से अधिक कार्बाइनों में भारत फोर्ज कितना हिस्सा आपूर्ति करेगा?
व्याख्या · सही उत्तर Aरक्षा मंत्रालय ने भारत फोर्ज लिमिटेड और PLR Systems Pvt Ltd के साथ 4.25 लाख से अधिक CQB कार्बाइनों के अनुबंध की पुष्टि की है। विक्रेता-विभाजन पर उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार भारत फोर्ज लगभग 60% कार्बाइन देगा, जबकि Adani-IWI संयुक्त उद्यम PLR Systems शेष लगभग 40% देगा। इसलिए भारत फोर्ज का हिस्सा लगभग 2.55 लाख कार्बाइन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय सेना के कार्बाइन अनुबंध की राशि और कुल मात्रा क्या है?
भारतीय सेना ने लगभग ₹2,700 करोड़ का अनुबंध किया है। इसके तहत 4.25 लाख नज़दीकी लड़ाई वाली कार्बाइन खरीदी जाएंगी।
इस अनुबंध में आपूर्तिकर्ताओं का बंटवारा कैसे है?
भारत फोर्ज की कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स 2.5 लाख कार्बाइन, यानी 60% हिस्सा, देगी। अदाणी पीएलआर सिस्टम्स 1.75 लाख कार्बाइन, यानी 40% हिस्सा, देगी।
कार्बाइन की आपूर्ति कब शुरू होने की उम्मीद है?
कार्बाइन की आपूर्ति सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
नज़दीकी लड़ाई वाली कार्बाइन सैन्य दृष्टि से क्यों उपयोगी हैं?
ये कॉम्पैक्ट हथियार सीमित जगहों, शहरी कार्रवाई, आतंकवाद-रोधी अभियानों और इमारतों की तलाशी जैसी स्थितियों में उपयोगी होते हैं, जहां लंबी राइफलें कम सुविधाजनक हो सकती हैं।
यह अपडेट परीक्षा के किन विषयों से जुड़ा है?
यह रक्षा, विज्ञान-तकनीक, शासन, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी विनिर्माण और पैदल सेना आधुनिकीकरण से जुड़ा है।