23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन 5 दिसंबर 2025 को संपन्न हुआ। इसका विषय 'रूस-भारत: विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित, समय की कसौटी पर खरी उतरी प्रगतिशील साझेदारी' था। सम्मेलन में 16 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने '2030 तक भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास का कार्यक्रम' अपनाया, जिसका लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को वित्त वर्ष 2024-25 के 65 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर करना है।

पुतिन ने कहा कि रूस भारत को तेल, गैस और कोयले की 'निर्बाध आपूर्ति' करने के लिए तैयार है। समझौतों में रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास, परमाणु सहयोग के तहत कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) को आगे बढ़ाना और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा शामिल थे। प्रवासन, स्वास्थ्य, समुद्री प्रशिक्षण, सीमा शुल्क, शिक्षा जगत और मीडिया पर भी समझौते हुए। सम्मेलन में 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' की फिर से पुष्टि की गई।