वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की खाद्य और उर्वरक सब्सिडी की कुल राशि ₹3.71 लाख करोड़ रही। इसमें खाद्य सब्सिडी के लिए ₹2.03 लाख करोड़ थे, जिसके तहत अक्टूबर 2025 तक 78.90 करोड़ लाभार्थियों को मुफ़्त खाद्यान्न मिल रहा था। उर्वरक सब्सिडी के लिए ₹2.02 लाख करोड़ आवंटित किए गए थे, जिनमें से 16 मार्च 2026 तक ₹1.93 लाख करोड़ खर्च हो चुके थे। जून 2025 तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत भुगतान तिगुना होकर ₹3.33 लाख करोड़ पहुंच गया। भारत पोटाश की 90% और फ़ॉस्फेट की 60% ज़रूरत आयात से पूरी करता है।

नीति विश्लेषकों ने सब्सिडी को पीएम-किसान में मिलाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण अपनाने और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुरूप ‘ग्रीन बॉक्स’ उपायों की ओर बढ़ने का सुझाव दिया है। यूरिया पर नीम की परत चढ़ाना अनिवार्य होने के बावजूद सब्सिडी वाले यूरिया का अनुमानित 20-25% हिस्सा गैर-कृषि क्षेत्रों में पहुंच जाता है। राजस्थान में किसानों की बड़ी आबादी है और पीएम-किसान के 76 लाख लाभार्थी हैं। इसलिए सब्सिडी सुधार पर चल रही चर्चा का राज्य पर खास असर पड़ता है।