मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने 1 जून 2026 को राज्य में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी अभियान घोषित किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी सहित 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया। आगे 332 अधिकारियों और कर्मियों को जांच लंबित रहने तक निलंबित किया गया जबकि 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के तहत स्थायी रूप से रोकी गई जो कदाचार या भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर पेंशन रोकने की अनुमति देते हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और अन्य लागू कानूनों के तहत 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी की गई ताकि विशेष अदालतों में मुकदमे चलाए जा सकें। वर्तमान में सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध 577 मामलों में जांच चल रही है जबकि IAS और IPS सहित अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों से जुड़े 9 मामलों में अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत केंद्र सरकार की सहमति से जांच जारी है। इस अभियान के लिए राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) सामान्य प्रशासन विभाग के सतर्कता प्रकोष्ठ और संबंधित प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की शून्य-सहिष्णुता नीति के अनुरूप सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और मनमाने आचरण तथा जनता के विश्वास को धोखा देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध एक मजबूत संदेश भेजना चाहती है। यह कार्रवाई राजस्थान संपर्क 181 के माध्यम से डिजिटल शिकायत निवारण मुख्यमंत्री सुशासन मिशन राजस्थान लोक शिकायत अधिनियम 2018 ढांचे और राज्य के 350 अरब डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य के उद्देश्य से चल रहे प्रशासनिक सुधारों सहित व्यापक राजस्थान शासन प्रयास के बीच आती है।