मुख्य तथ्य

  • राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्ष के लिए नियुक्त होते हैं (राष्ट्रपति की इच्छानुसार)।
  • मुख्यमंत्री राजस्थान के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख हैं। राज्यपाल द्वारा नियुक्त (विधानसभा में बहुमत अनिवार्य), मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते...
  • निदेशालय राज्य सरकार की क्रियान्वयन शाखाएँ हैं
  • राजस्थान राजस्व मंडल (मुख्यालय: अजमेर) राजस्थान का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है।
  • राजस्थान लोकायुक्त की स्थापना राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के तहत हुई।

मुख्य बिंदु

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    राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्ष के लिए नियुक्त होते हैं (राष्ट्रपति की इच्छानुसार)। वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख और केन्द्र-राज्य संपर्क-सूत्र हैं।

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    मुख्यमंत्री राजस्थान के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख हैं। राज्यपाल द्वारा नियुक्त (विधानसभा में बहुमत अनिवार्य), मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं जो अनुच्छेद 164 के तहत विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।

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    राजस्थान सचिवालय (जयपुर) राज्य सरकार का सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय है। इसमें सचिव (आइएएस अधिकारी) मंत्रियों की नीति-निर्माण में सहायता करते हैं। यह राजस्थान सचिवालय मैनुअल और कार्य नियमों के तहत कार्य करता है।

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    मुख्य सचिव राजस्थान का वरिष्ठतम आइएएस अधिकारी है जो राज्य की नौकरशाही का प्रमुख है। वे मुख्यमंत्री के प्रमुख प्रशासनिक सलाहकार, विभागों के समन्वयक और राज्य सिविल सेवा बोर्ड के प्रमुख हैं।

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    निदेशालय राज्य सरकार की क्रियान्वयन शाखाएँ हैं — ये सचिवालय द्वारा निर्मित नीतियों को लागू करते हैं। कई राजस्थान निदेशालयों का मुख्यालय अजमेर में है (2023 में पूछा गया प्रश्न)।

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    राजस्थान राजस्व मंडल (मुख्यालय: अजमेर) राजस्थान का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है। यह भूमि राजस्व मामलों, राजस्व अभिलेखों और राजस्व विवादों पर अपील सुनता है। राजस्थान राजस्व मंडल अधिनियम, 1949 के तहत स्थापित।

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    राजस्थान लोकायुक्त की स्थापना राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के तहत हुई। लोकायुक्त सार्वजनिक सेवकों (मंत्रियों सहित) के विरुद्ध कुप्रशासन, भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग की शिकायतें जाँचता है (राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधायक और उच्च न्यायालय न्यायाधीश इसके दायरे से बाहर)।

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    राजस्थान पुलिस का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक, भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी, करते हैं। राजस्थान पुलिस रेंजों में विभाजित है, जिनका नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक करते हैं; जिलों का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक करते हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय जयपुर में है।

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    सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 (राजस्थान) — एक ऐतिहासिक कानून जो सरकारी अधिकारियों को नागरिकों की शिकायतें निर्धारित समय-सीमा में सुनने का अधिकार देता है। यह राष्ट्रीय मॉडल का अग्रदूत था।

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    राजस्थान लोक सेवा आयोग संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत स्थापित है। इसका मुख्यालय अजमेर में है। यह राजस्थान सरकार की समूह क और ख सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएँ आयोजित करता है। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।

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    राजस्थान लोक सेवाओं की प्रत्याभूति अधिनियम, 2011 — सुनवाई अधिकार से पहले; नागरिकों को निर्दिष्ट लोक सेवाओं की समयबद्ध प्राप्ति की गारंटी देता है। समय पर सेवा न मिलने पर स्वतः अपील का प्रावधान।

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    राजस्थान में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ: (क) स्पष्ट बहुमत न होने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति; (ख) विश्वास खो चुकी सरकार को बर्खास्त करना; (ग) विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखना; (घ) राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में कार्य करना।

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परिचय — भारत के संघीय ढाँचे में राज्य प्रशासन

राजस्थान का राज्य प्रशासन भारत के संघीय ढाँचे में राज्य सूची, समवर्ती सूची और स्थानीय प्रशासन के कामों को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, सचिवालय, मुख्य सचिव और जिला प्रशासन के ज़रिए चलाता है। भारत की संघीय संरचना, जिसे के. सी. व्हेयर ने “अर्ध-संघीय” और व्यवहार में “सहकारी संघवाद” कहा है, सातवीं अनुसूची के ज़रिए प्रशासनिक कार्यों को संघ और राज्यों के बीच बाँटती है। इसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं। राजस्थान वन विभाग के राज्य-परिचय आँकड़ों के अनुसार राजस्थान का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी है, इसलिए क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का सबसे बड़ा राज्य है। बड़े भू-भाग, रेगिस्तानी जिलों, सीमा-क्षेत्रों और बिखरी बस्तियों के कारण राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था स्वाभाविक रूप से जटिल है।

राजस्थान का राज्य प्रशासन तीन स्तरों पर संरचित है:

1. राज्य स्तर: राज्यपाल → मुख्यमंत्री → मंत्रिपरिषद → सचिवालय → मुख्य सचिव

2. संभागीय स्तर: संभागीय आयुक्त; राजस्थान में परंपरागत रूप से जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर जैसे संभाग प्रशासनिक समन्वय की धुरी रहे हैं।

3. जिला स्तर: कलेक्टर → उप-मंडल अधिकारी → तहसीलदार। जिला प्रशासन का विस्तृत अध्ययन विषय 122 में किया जाता है।

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15Mराजस्थान के राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ क्या हैं?5 अंक · 50 शब्द

मॉडल उत्तर

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ (बिना CM की सलाह के): (1) अस्पष्ट बहुमत पर CM नियुक्ति — बहुमत योग्य नेता को आमंत्रण; (2) विश्वास खो चुकी सरकार को बर्खास्त करना; (3) विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रखना — विशेषतः उच्च न्यायालय से संबंधित; (4) अनुच्छेद 356 के तहत संवैधानिक संकट की रिपोर्ट; (5) राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति।

~50 शब्द · 5 अंक