राजस्थान ने 41,685.53 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ देश में अपनी अग्रणी स्थिति और मज़बूत की है। यह किसी भी राज्य में सबसे अधिक है और भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता का लगभग 27% है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 154.24 गीगावाट हो गई थी। गुजरात लगभग 31.10 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है और उसके बाद महाराष्ट्र है। राजस्थान की इस बढ़त के पीछे कई बुनियादी वजहें हैं। राज्य में हर साल 325 से अधिक दिन आसमान साफ़ रहता है और भरपूर धूप मिलती है। बड़े सौर पार्क लगाने लायक देश का सबसे बड़ा शुष्क व अर्ध-शुष्क भूभाग भी यहीं है। भूमि आवंटन की अनुकूल नीतियों, बिजली खरीद समझौतों और राइजिंग राजस्थान निवेश सम्मेलन से सौर क्षेत्र में निवेश को तेज़ी मिली है। जोधपुर जिले का 2,245 मेगावाट से अधिक क्षमता वाला भड़ला सौर पार्क दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है और राज्य के सौर ऊर्जा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2030 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर ऊर्जा की मुख्य भूमिका होगी। राजस्थान में सौर ऊर्जा का विस्तार भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में की गई '2070 तक नेट ज़ीरो' की प्रतिबद्धता को भी आगे बढ़ाता है। फिर भी बिजली पारेषण व्यवस्था की कमियाँ, पशुपालक और जनजातीय समुदायों से जुड़े भूमि अधिग्रहण के जटिल सवाल, पैनल साफ़ करने के लिए पानी की कमी तथा मौसम के साथ घटने-बढ़ने वाले सौर उत्पादन को ग्रिड की स्थिरता के साथ जोड़ना ऐसी चुनौतियाँ हैं जिन पर नीतिगत ध्यान ज़रूरी है।
41,685.53 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ राजस्थान देश में पहले स्थान पर; भारत की कुल सौर क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी 27%
राजस्थान ने 41,685.53 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ देश में अपनी अग्रणी स्थिति और मज़बूत की है। यह किसी भी राज्य में सबसे अधिक है और भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता का लगभग 27% है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 154.24 गीगावाट हो गई थी। गुजरात लगभग 31.10 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है और उसके बाद महाराष्ट्र है। राजस्थान की इस बढ़त के पीछे कई बुनियादी वजहें हैं। राज्य में हर साल 325 से अधिक दिन आसमान साफ़ रहता है और भरपूर धूप मिलती है। बड़े सौर पार्क लगाने लायक देश का सबसे बड़ा शुष्क व अर्ध-शुष्क भूभाग भी यहीं है। भूमि आवंटन की अनुकूल नीतियों, बिजली खरीद समझौतों और राइजिंग राजस्थान निवेश सम्मेलन से सौर क्षेत्र में निवेश को तेज़ी मिली है। जोधपुर जिले का 2,245 मेगावाट से अधिक क्षमता वाला भड़ला सौर पार्क दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है और राज्य के सौर ऊर्जा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2030 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर ऊर्जा की मुख्य भूमिका होगी। राजस्थान में सौर ऊर्जा का विस्तार भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में की गई '2070 तक नेट ज़ीरो' की प्रतिबद्धता को भी आगे बढ़ाता है। फिर भी बिजली पारेषण व्यवस्था की कमियाँ, पशुपालक और जनजातीय समुदायों से जुड़े भूमि अधिग्रहण के जटिल सवाल, पैनल साफ़ करने के लिए पानी की कमी तथा मौसम के साथ घटने-बढ़ने वाले सौर उत्पादन को ग्रिड की स्थिरता के साथ जोड़ना ऐसी चुनौतियाँ हैं जिन पर नीतिगत ध्यान ज़रूरी है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान 41,685.53 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है; यह भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता का लगभग 27% है।
- भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 30 अप्रैल 2026 तक 154.24 गीगावाट हो गई थी।
- राजस्थान में हर साल 325 से अधिक दिन आसमान साफ़ रहता है और भरपूर धूप मिलती है। सौर पार्कों के लिए विशाल शुष्क भूभाग भी उपलब्ध है।
- जोधपुर का भड़ला सौर पार्क 2,245 मेगावाट से अधिक क्षमता के साथ दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में शामिल है।
- राजस्थान ने 2030 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर ऊर्जा की मुख्य भूमिका होगी।
- प्रमुख चुनौतियों में पारेषण व्यवस्था की कमियाँ, भूमि अधिग्रहण, पैनल साफ़ करने के लिए पानी की कमी और ग्रिड की स्थिरता शामिल हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2030 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के संदर्भ में भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में राजस्थान की अग्रणी भूमिका, प्राकृतिक बढ़त, नीतिगत समर्थन और मौजूदा चुनौतियों की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
30 अप्रैल 2026 तक राजस्थान 41,685.53 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ देश में अग्रणी था। देश की कुल स्थापित सौर क्षमता 154.24 गीगावाट थी और इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 27% थी। साफ़ धूप, शुष्क भूमि, अनुकूल भूमि नीतियों, बिजली खरीद समझौतों और भड़ला सौर पार्क ने इस बढ़त को सहारा दिया है। 2030 तक 90 गीगावाट के लक्ष्य के सामने पारेषण, भूमि, पानी और ग्रिड से जुड़ी चुनौतियाँ हैं।
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राइजिंग राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा प्रोफ़ाइल के अनुसार, राजस्थान लगभग कितनी स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के साथ सौर ऊर्जा में पहले स्थान पर है?
राइजिंग राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा प्रोफ़ाइल में राजस्थान को 22,860.73 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ सौर ऊर्जा में पहले स्थान पर बताया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए इस तथ्य को स्रोत के संदर्भ में पढ़ना ज़रूरी है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता कितनी है और भारत की कुल सौर क्षमता में इसका कितना हिस्सा है?
राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 41,685.53 मेगावाट है, जो भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता का लगभग 27% है। इस कारण राजस्थान सभी राज्यों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी है।
अप्रैल 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता कितनी थी और दूसरे स्थान पर कौन-सा राज्य था?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 154.24 गीगावाट हो गई थी। गुजरात लगभग 31.10 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है और उसके बाद महाराष्ट्र है।
भड़ला सौर पार्क क्या है और इसका क्या महत्व है?
भड़ला सौर पार्क राजस्थान के जोधपुर जिले में है और इसकी स्थापित क्षमता 2,245 मेगावाट से अधिक है। यह दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है और सौर ऊर्जा में राजस्थान की अग्रणी स्थिति का एक प्रमुख आधार है।
2030 के लिए राजस्थान का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है और प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
राजस्थान ने 2030 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर ऊर्जा की मुख्य भूमिका होगी। प्रमुख चुनौतियों में पारेषण व्यवस्था की कमियाँ, भूमि अधिग्रहण, पैनल साफ़ करने के लिए पानी की कमी और ग्रिड की स्थिरता शामिल हैं।
राजस्थान को सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनाने वाले प्राकृतिक कारण क्या हैं?
राजस्थान में हर साल 325 से अधिक दिन आसमान साफ़ रहता है और भरपूर धूप मिलती है। सौर पार्कों के लिए विशाल शुष्क भूभाग भी उपलब्ध है। इसलिए यहाँ बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।
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