प्रकाशित: 20 जनवरी 2026बिज़नेस स्टैंडर्डटॉपिक
DoT ने भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 सेवाओं के लिए निचले 6 GHz बैंड को लाइसेंस-मुक्त किया
दूरसंचार विभाग (DoT) ने 21 जनवरी 2026 को निचला 6 GHz बैंड (5925-6425 MHz) औपचारिक रूप से डीलाइसेंस किया, जिससे Wi-Fi और अन्य कम शक्ति वाले वायरलेस अनुप्रयोगों के लिए इसका उपयोग बिना शुल्क और साझा आधार पर किया जा सकेगा।
इस निर्णय से भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 तकनीक का रास्ता खुलता है। ये तकनीकें क्लाउड गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी और IoT के लिए तेज गति और कम विलंब देती हैं। हालांकि, स्पेक्ट्रम का उपयोग कम शक्ति वाले इनडोर और बहुत कम शक्ति वाले आउटडोर उपयोग तक सीमित है। विमान और चलते वाहनों में इसका उपयोग प्रतिबंधित है। टेलीकॉम कंपनियां 5G/IMT के लिए यह बैंड चाहती थीं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दूरसंचार विभाग द्वारा भारत में वाई-फाई उपयोग के लिए निचले 6 गीगाहर्ट्ज बैंड (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को डीलाइसेंस करने के निर्णय के महत्व की चर्चा कीजिए तथा डिजिटल कनेक्टिविटी एवं स्पेक्ट्रम नीति पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
21 जनवरी 2026 को दूरसंचार विभाग ने 5925-6425 मेगाहर्ट्ज बैंड को डीलाइसेंस कर साझा, गैर-अनन्य आधार पर वाई-फाई 6ई एवं वाई-फाई 7 की तैनाती का रास्ता खोला। नियमों में कम-शक्ति इनडोर तथा अति-निम्न-शक्ति आउटडोर उपयोग तक सीमा रखी गई; विमानों-वाहनों पर रोक है। निर्णय दूरसंचार कंपनियों के 5जी दावों को खारिज कर क्लाउड गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी, आईओटी कनेक्टिविटी बढ़ाता है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
दूरसंचार विभाग ने जनवरी 2026 में निचले 6 GHz बैंड (5925-6425 MHz) को डीलाइसेंस किया। इससे किन प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल का रास्ता खुलता है?
व्याख्या · सही उत्तर BDoT ने 21 जनवरी 2026 को निचले 6 GHz बैंड को डीलाइसेंस किया, जिससे भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 की तैनाती संभव हुई। यह बैंड बिना शुल्क के साझा, गैर-अनन्य आधार पर उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
DoT द्वारा लोअर 6 GHz बैंड को लाइसेंस-मुक्त करना क्या है?
दूरसंचार विभाग (DoT) ने लोअर 6 GHz बैंड (5925-6425 MHz) को बिना लाइसेंस वाले उपयोग के लिए खोल दिया है। इससे भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 तकनीकों को लागू करना संभव होगा। यह तेज वायरलेस ब्रॉडबैंड के लिए 500 MHz अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराता है।
Wi-Fi 6E क्या है और यह सामान्य Wi-Fi 6 से कैसे अलग है?
**Wi-Fi 6E**, **Wi-Fi 6 (802.11ax)** का ही विस्तार है, जो नए **6 GHz बैंड** में काम करता है। इसमें **9.6 Gbps तक की गति** और कम लेटेंसी मिलती है। **Wi-Fi 7** (802.11be) अगली पीढ़ी की तकनीक है, जिसमें **46 Gbps तक** की गति मिलती है।
DoT द्वारा 6 GHz बैंड डीलाइसेंसिंग का भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए क्या महत्व है?
**6 GHz बैंड डीलाइसेंसिंग** भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है। इससे **गीगाबिट घरेलू ब्रॉडबैंड**, **इंडस्ट्री 4.0** (IoT, AR/VR) संभव होते हैं और हवाई अड्डों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर **तेज़ Wi-Fi** मिल सकता है। यह **राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन** के अनुरूप है।
6 GHz Wi-Fi डीलाइसेंसिंग टेलीकॉम स्पेक्ट्रम नीलामी से कैसे अलग है?
**डीलाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम** (6 GHz बैंड) **बिना शुल्क के** उपयोग के लिए उपलब्ध है, जबकि लाइसेंस वाले स्पेक्ट्रम के लिए टेलीकॉम कंपनियाँ अरबों रुपये देती हैं। इससे कनेक्टिविटी अधिक लोगों तक पहुँचती है — **Wi-Fi 6E/7** बिना स्पेक्ट्रम शुल्क के लगाया जा सकता है।
किन देशों ने Wi-Fi के लिए 6 GHz बैंड खोला है और भारत की वैश्विक स्थिति क्या है?
**अमेरिका, EU, ब्राज़ील, सऊदी अरब, UAE** और **दक्षिण कोरिया** ने पूरा 6 GHz बैंड खोला है। भारत ने **निचला 500 MHz** (5925-6425 MHz) खोला है — यह वैश्विक अग्रणी देशों की तुलना में आंशिक है, लेकिन कई विकासशील देशों से आगे है और भारत की **स्पेक्ट्रम नीति** को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने का संकेत देता है।