दूरसंचार विभाग (DoT) ने 21 जनवरी 2026 को निचला 6 GHz बैंड (5925-6425 MHz) औपचारिक रूप से डीलाइसेंस किया, जिससे Wi-Fi और अन्य कम शक्ति वाले वायरलेस अनुप्रयोगों के लिए इसका उपयोग बिना शुल्क और साझा आधार पर किया जा सकेगा।

इस निर्णय से भारत में Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 तकनीक का रास्ता खुलता है। ये तकनीकें क्लाउड गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी और IoT के लिए तेज गति और कम विलंब देती हैं। हालांकि, स्पेक्ट्रम का उपयोग कम शक्ति वाले इनडोर और बहुत कम शक्ति वाले आउटडोर उपयोग तक सीमित है। विमान और चलते वाहनों में इसका उपयोग प्रतिबंधित है। टेलीकॉम कंपनियां 5G/IMT के लिए यह बैंड चाहती थीं।