22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी 2.0 भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़ा सुधार है। प्रधानमंत्री ने इसे जीएसटी बचत उत्सव कहा, क्योंकि इसका मुख्य संदेश आम उपभोक्ता, परिवार, किसान, MSME और छोटे कारोबारियों को राहत देना था। इस सुधार में कर स्लैब को सरल बनाया गया, 375 से अधिक वस्तुओं पर दरें घटाई गईं और अनुपालन का बोझ कम करने पर ज़ोर दिया गया। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय अर्थव्यवस्था, राजकोषीय नीति, उपभोग, कर सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़ता है।
मुख्य बदलाव दरों के युक्तिकरण से जुड़ा है। सुधारों ने 5% और 18% की सरल संरचना को प्रमुख बनाया, जबकि लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40% दर रखी गई। रोज़मर्रा की वस्तुओं, दवाओं, मेडिकल उपकरणों, कृषि उपकरणों, दोपहिया, छोटी कारों, टीवी, एसी और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में दरों में कमी से लागत घटने और मांग बढ़ने की उम्मीद जोड़ी गई। इससे घरों की खरीद-क्षमता, किसानों की लागत, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ता है।
स्टैटिक जीके के लिए जीएसटी का मूल संदर्भ याद रखना ज़रूरी है। जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था और इसका लक्ष्य कई केंद्रीय और राज्य करों को एकीकृत कर राष्ट्रीय बाज़ार, पारदर्शिता और कर-क्रेडिट व्यवस्था को मज़बूत करना था। इसलिए जीएसटी 2.0 को केवल दर-कटौती की खबर नहीं, बल्कि कर-संरचना को सरल करने, अनुपालन घटाने और उपभोग-आधारित आर्थिक गति को सहारा देने वाले सुधार के रूप में पढ़ना चाहिए। मुख्य परीक्षा में इससे राजस्व संतुलन, कर-आधार, संघीय सहमति, MSME राहत और कल्याण बनाम राजस्व के संतुलन पर सवाल बन सकते हैं।
