प्रकाशित: 21 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
राष्ट्रपति ने SHANTI विधेयक 2025 को मंजूरी दी; इसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 का स्थान लिया
भारत के राष्ट्रपति ने 22 दिसंबर 2025 को सतत दोहन और परमाणु ऊर्जा उन्नयन से भारत परिवर्तन (SHANTI) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी। इस ऐतिहासिक कानून ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक देयता परमाणु क्षति अधिनियम, 2010 का स्थान लिया है। SHANTI अधिनियम स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPPs) और अन्य योग्य निजी संस्थाओं को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और डीकमीशन करने की अनुमति देता है। इस तरह यह भारत के परमाणु ऊर्जा ढांचे में बुनियादी बदलाव करता है।
संसद के दोनों सदनों ने 18 दिसंबर 2025 को विधेयक पारित किया। अधिनियम 2047 तक भारत की परमाणु क्षमता को 100 GW तक बढ़ाने के लक्ष्य में तेजी लाने के लिए नया नियामक ढांचा बनाता है। इसमें परमाणु क्षति कोष और स्वतंत्र सांविधिक निकाय के रूप में परमाणु नियामक प्राधिकरण की स्थापना भी की गई है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: शांति अधिनियम 2025 से आए संरचनात्मक सुधारों का विश्लेषण कीजिए, जिसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 का स्थान लिया और भारत के परमाणु ऊर्जा ढांचे का पुनर्गठन किया।
उत्तर (50 शब्द):
22 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति ने शांति अधिनियम 2025 को मंजूरी दी, जिसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 तथा नागरिक देयता परमाणु क्षति अधिनियम 2010 का स्थान लिया। यह स्वतंत्र बिजली उत्पादकों को परमाणु संयंत्रों के निर्माण और संचालन की अनुमति देता है, क्षति कोष तथा नियामक प्राधिकरण स्थापित करता है और 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखता है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
शांति अधिनियम 2025 निम्नलिखित में से किन विधानों का स्थान लेता है?
1. परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962
2. नाभिकीय क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010
3. परमाणु सुरक्षा नियामक प्राधिकरण विधेयक, 2011
सही उत्तर चुनिए:
व्याख्या · सही उत्तर Bशांति अधिनियम 2025, यानी भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति अधिनियम, परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 तथा नाभिकीय क्षति नागरिक दायित्व अधिनियम 2010 का स्थान लेता है।