10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी कार में धमाका हुआ। इसमें 11 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। यह धमाका 17वीं सदी के मुगलकालीन स्मारक के पास भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक सिग्नल पर हुआ। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने बाद में अपने आरोपपत्र में कहा कि यह वाहन में रखे गए तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (VBIED) का विस्फोट था, जिसमें ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (TATP) का इस्तेमाल हुआ था।

12 नवंबर को भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से इस घटना को आतंकी कृत्य माना। NIA की जाँच में पता चला कि कार पुलवामा के डॉक्टर उमर मोहम्मद से जुड़ी थी। बाद के आरोपपत्र में भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) की शाखा अंसार गज़वत-उल-हिंद से जुड़े 10 आरोपियों के नाम थे। मंत्रिमंडल ने हमले की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया। प्रधानमंत्री मोदी विस्फोट के पीड़ितों से मिलने लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) गए।