भारत के राष्ट्रपति ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 को मंजूरी दी, जिससे मूल डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रवर्तन संबंधी प्रावधान लागू होते हैं। यह संशोधन भारत के डेटा संरक्षण बोर्ड को वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित करता है, जिसके पास शिकायतें सुनने और डेटा उल्लंघनों पर दंड लगाने की न्यायिक शक्तियाँ होंगी।

अधिनियम डेटा प्रत्ययियों के लिए सहमति प्रबंधक नियुक्त करना और डेटा प्रधानों को सहमति वापस लेने की स्पष्ट प्रक्रिया देना अनिवार्य करता है, जिससे शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होता है। उल्लंघनों पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बोर्ड मुख्य रूप से डिजिटल तरीके से काम करेगा और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित करेगा।