प्रकाशित: 24 दिसंबर 2025शासन
राष्ट्रपति ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 को मंज़ूरी दी
भारत के राष्ट्रपति ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 को मंज़ूरी दी, जिससे मूल डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रवर्तन संबंधी प्रावधान लागू होते हैं। यह संशोधन भारत के डेटा संरक्षण बोर्ड को वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित करता है। बोर्ड को शिकायतें सुनने और डेटा उल्लंघनों पर दंड लगाने की अधिनिर्णय संबंधी शक्तियाँ प्राप्त होंगी।
अधिनियम डेटा न्यासियों के लिए सहमति प्रबंधक नियुक्त करना और डेटा प्रधानों को सहमति वापस लेने की स्पष्ट प्रक्रिया देना अनिवार्य करता है। इससे शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होता है। उल्लंघनों पर ₹250 करोड़ तक का ज़ुर्माना लगाया जा सकता है। बोर्ड मुख्य रूप से डिजिटल तरीके से काम करेगा और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित करेगा। भारत का डेटा संरक्षण ढाँचा अब 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अपने दायरे में लाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 क्या है और इसे क्यों लाया गया?
भारत के राष्ट्रपति ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 को मंज़ूरी दी। इससे मूल डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रवर्तन संबंधी प्रावधान लागू होते हैं और भारत का डेटा संरक्षण बोर्ड अधिनिर्णय संबंधी शक्तियों वाले वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित होता है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
यह भारत के डेटा संरक्षण बोर्ड को शिकायतें सुनने और डेटा उल्लंघनों पर दंड लगाने का अधिकार देता है। यह डेटा न्यासियों के लिए सहमति प्रबंधक नियुक्त करना और डेटा प्रधानों को सहमति वापस लेने की स्पष्ट प्रक्रिया देना भी अनिवार्य करता है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 का 2023 के अधिनियम से क्या संबंध है?
यह संशोधन मूल डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रवर्तन संबंधी प्रावधानों को लागू करता है। यह डेटा न्यासियों के लिए सहमति प्रबंधक नियुक्त करना और डेटा प्रधानों को सहमति वापस लेने की स्पष्ट प्रक्रिया देना अनिवार्य करता है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2025 में दंड और बोर्ड की कार्यप्रणाली के बारे में क्या प्रावधान हैं?
उल्लंघनों पर ₹250 करोड़ तक का ज़ुर्माना लगाया जा सकता है। डेटा संरक्षण बोर्ड मुख्य रूप से डिजिटल तरीके से काम करेगा और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित करेगा।
भारत का डेटा संरक्षण ढाँचा अब कितने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अपने दायरे में लाता है?
भारत का डेटा संरक्षण ढाँचा अब 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अपने दायरे में लाता है।