29-30 जनवरी 2026 को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के कृषि और जलवायु अध्याय में खाद्य सुरक्षा, बागवानी, ग्रामीण विकास और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियाँ बताई गई हैं।

भारत में 2024-25 में 35.77 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ, जो देश के इतिहास में सबसे अधिक है। इसमें हरित क्रांति के दौर से चले आ रहे निवेश और आधुनिक कृषि तकनीक, दोनों की भूमिका रही है। इतने रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सर्वेक्षण ने एक संरचनात्मक बदलाव की ओर ध्यान दिलाया: कृषि सकल मूल्य वर्धन में बागवानी का योगदान अब 33% है और वह खाद्यान्न क्षेत्र से आगे निकल गई है। बागवानी से प्रति एकड़ अधिक मूल्य मिलता है और इसमें अधिक श्रम लगता है, इसलिए किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में इसका खास महत्त्व है।

सर्वेक्षण के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत 20 नवंबर 2025 तक लगभग 15.74 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी 81.31%, को नल कनेक्शन मिल चुके थे। यह ग्रामीण प्रशासन की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है। घर तक पीने का पानी पहुँचने से ग्रामीण क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य बेहतर होता है, महिलाओं का पानी लाने में लगने वाला समय बचता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ती है।

सर्वेक्षण में बताया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने सूखे, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और खारी मिट्टी के अनुकूल 100 से अधिक जलवायु-अनुकूल बीज किस्में विकसित करके जारी की हैं। बढ़ते तापमान के अनुसार भारत की कृषि को ढालने की रणनीति में इन किस्मों की अहम भूमिका है।

भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता कुल स्थापित क्षमता के 51.93% को पार कर गई है। इसका अर्थ है कि देश की आधी से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता अब नवीकरणीय या परमाणु स्रोतों पर आधारित है। पेरिस समझौते के तहत भारत ने 2030 तक गैर-जीवाश्म क्षमता का हिस्सा 50% करने का लक्ष्य रखा था, जिसे वह समय से पहले पार कर चुका है। इससे भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी देश बन गया है। गैर-जीवाश्म स्रोतों में सौर और पवन ऊर्जा का हिस्सा सबसे बड़ा है, जबकि बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का भी उल्लेखनीय योगदान है।