प्रकाशित: 29 जनवरी 2026समाचार स्रोतपर्यावरण
आर्थिक सर्वेक्षण का कृषि एवं जलवायु अध्याय: रिकॉर्ड 35.77 करोड़ टन खाद्यान्न; गैर-जीवाश्म बिजली 51.93% के पार
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के कृषि एवं जलवायु अध्याय में खाद्य सुरक्षा, बागवानी, ग्रामीण विकास और स्वच्छ ऊर्जा में ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख किया गया।
भारत ने 2024-25 में 35.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया — देश के इतिहास में सर्वाधिक। इसके बावजूद सर्वेक्षण ने एक संरचनात्मक बदलाव रेखांकित किया: बागवानी अब कृषि GVA में 33% योगदान देती है, जो खाद्यान्न क्षेत्र से अधिक है। प्रति एकड़ अधिक कीमत और श्रम-गहनता के कारण बागवानी किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की महत्त्वपूर्ण वाहक है।
सर्वेक्षण में 20 नवंबर 2025 तक जल जीवन मिशन के तहत लगभग 15.74 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी 81.31%, को नल कनेक्शन मिलने का उल्लेख है — यह ग्रामीण सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिलाओं के समय की बचत के लिहाज से एक परिवर्तनकारी उपलब्धि है।
कृषि को अधिक लचीला बनाने के संदर्भ में सर्वेक्षण ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) प्रणाली द्वारा विकसित 100 से अधिक जलवायु-लचीली बीज किस्मों — जो सूखा, बाढ़, ताप दबाव और खारी मिट्टी के अनुकूल हैं — की जानकारी दी।
सबसे महत्त्वपूर्ण पर्यावरण आँकड़ा: भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित बिजली उत्पादन क्षमता कुल स्थापित क्षमता के 51.93% को पार कर गई है। यह 2030 के पेरिस समझौते के 50% गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य से पहले ही प्राप्त हो गई है और भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेता के रूप में स्थापित करती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में बागवानी का कृषि GVA में 33% योगदान का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि बागवानी (फल, सब्जियाँ, फूल, बागान फसलें) अब पारंपरिक खाद्यान्न क्षेत्र से अधिक आर्थिक मूल्य देती है। यह ढांचागत बदलाव प्रति एकड़ अधिक मूल्य और अधिक श्रम-आवश्यकता को दिखाता है।
भारत के 357.7 MMT खाद्यान्न उत्पादन का क्या महत्त्व है?
2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 35.77 करोड़ टन रहा, जो अब तक का सर्वाधिक है। इससे 140 करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है और वैश्विक कमोडिटी कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति जोखिम कम होता है।
भारत की 51.93% गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता पेरिस समझौते से कैसे जुड़ी है?
भारत ने 2015 में पेरिस में 2030 तक 50% स्थापित क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से रखने का लक्ष्य घोषित किया था। 2026 में ही 51.93% के स्तर को पार करना बताता है कि यह लक्ष्य चार साल पहले हासिल हो गया।
जलवायु सहनशील बीज किस्में क्या हैं?
ICAR द्वारा विकसित ये किस्में सूखा, बाढ़, अत्यधिक ताप और खारी मिट्टी के अनुकूल हैं। भारत की 60% कृषि भूमि वर्षा-निर्भर होने के कारण ये किस्में जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों की आजीविका और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की रक्षा करती हैं।
जल जीवन मिशन के तहत 81.31% ग्रामीण घरों तक नल कनेक्शन पहुंचने का क्या महत्त्व है?
आधिकारिक आंकड़े का अर्थ है कि 20 नवंबर 2025 तक लगभग 15.74 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी 81.31%, के पास नल कनेक्शन थे। इससे जलजनित रोगों का बोझ कम होता है, महिलाओं का पानी लाने में लगने वाला समय बचता है और ग्रामीण आर्थिक उत्पादकता बढ़ती है।