प्रकाशित: 15 फ़रवरी 2026PIB/MoDटॉपिक
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹3.60 लाख करोड़ की खरीद को मंजूरी दी: P-8I विमान, T-72 टैंक ओवरहाल, नौसेना की गैस टर्बाइन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायु सेना, थल सेना, नौसेना और तटरक्षक बल के लिए लगभग ₹3.60 लाख करोड़ (लगभग 3,600 अरब रुपये) की व्यापक खरीद को मंजूरी दी।
सबसे महत्वपूर्ण मंजूरियों में अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन लंबी दूरी के समुद्री निगरानी और पनडुब्बी-रोधी युद्धक विमानों की खरीद शामिल है। P-8I, बोइंग के P-8 पोसीडॉन का एक संस्करण है और भारतीय नौसेना द्वारा पहले से संचालित है। यह हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी, पनडुब्बी गतिविधियों पर नज़र रखने और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
थल सेना के लिए T-72 अजेय मुख्य युद्धक टैंकों और BMP-II पैदल सेना लड़ाकू वाहनों के ओवरहाल और सेवा-काल बढ़ाने के कार्यक्रमों को मंजूरी मिली। ये वाहन भारत की बख्तरबंद हमला क्षमता का बड़ा हिस्सा हैं। स्वदेशी अर्जुन टैंक और फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल जैसे आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के आगे बढ़ने के साथ युद्ध तत्परता बनाए रखने के लिए ये ओवरहाल जरूरी हैं।
नौसेना को युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन इंजन की मंजूरी मिली, जिससे विदेशी प्रणोदन प्रणाली पर निर्भरता कम होगी। थल सेना के लिए विभव एंटी-टैंक माइंस और तटरक्षक के लिए कई अन्य प्रणालियां भी स्वीकृत की गईं।
इसी बैठक में यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा दिया गया, जिससे उसकी वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता बढ़ेगी। भारत की मेक इन इंडिया पहल के तहत स्वदेशी खरीद को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार बनाने का प्रयास जारी है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बैठक में DAC द्वारा स्वीकृत रक्षा खरीद की कुल राशि कितनी है?
DAC ने लगभग ₹3.60 लाख करोड़ (लगभग 3,600 अरब रुपये) की खरीद को मंजूरी दी।
भारतीय नौसेना के लिए स्वीकृत P-8I पोसीडॉन विमान की प्राथमिक भूमिका क्या है?
P-8I पोसीडॉन लंबी दूरी का समुद्री निगरानी और पनडुब्बी-रोधी युद्धक विमान है। इसका उपयोग हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी, पनडुब्बी गतिविधियों का पता लगाने और समुद्री क्षेत्र जागरूकता के लिए होता है।
T-72 और BMP-II के ओवरहाल क्यों आवश्यक थे?
T-72 अजेय टैंक और BMP-II पैदल सेना लड़ाकू वाहन भारत की बख्तरबंद हमला क्षमता का बड़ा हिस्सा हैं। स्वदेशी आधुनिकीकरण (अर्जुन टैंक, फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल) आगे बढ़ रहा है, इसलिए युद्ध तत्परता बनाए रखने के लिए ओवरहाल जरूरी हैं।
यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के लिए मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?
मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा YIL को वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता देता है, जिससे वह नियमित निर्णयों के लिए सरकारी मंजूरी के बिना स्वतंत्र रूप से निवेश और विस्तार कर सकता है।
गैस टर्बाइन इंजन की मंजूरी भारत के स्वदेशीकरण लक्ष्यों में कैसे मदद करती है?
नौसेना युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन की मंजूरी विदेशी प्रणोदन पर निर्भरता कम करती है और मेक इन इंडिया पहल के तहत आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाती है।