केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में भारतीय फार्माकोपिया 2026 का 10वां संस्करण जारी किया। भारतीय फार्माकोपिया दवाओं के गुणवत्ता मानकों का आधिकारिक संकलन है और औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत कानूनी रूप से लागू है। इसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय फार्माकोपिया आयोग प्रकाशित करता है। भारतीय फार्माकोपिया पहली बार 1955 में प्रकाशित हुआ था, इसलिए 2026 का संस्करण भारत के दवा-मानक तंत्र की लंबी संस्थागत यात्रा को भी दिखाता है।

भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नई मोनोग्राफ जोड़ी गईं और कुल संख्या 3,340 हो गई। इनमें रक्त आधान चिकित्सा के लिए 20 नई मोनोग्राफ शामिल हैं। इस संस्करण में क्षयरोग-रोधी, मधुमेह-रोधी, कैंसर-रोधी दवाओं और आयरन तथा माइक्रोन्यूट्रिएंट सप्लीमेंट्स से जुड़े मानकों का दायरा भी बढ़ाया गया। परीक्षा की दृष्टि से दवा मानक सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य, गुणवत्ता नियंत्रण और नियामकीय जवाबदेही से जुड़े हैं, इसलिए संस्था, कानून और मानक-सूची के तथ्य महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

प्रीलिम्स में इससे संस्था, अधिनियम, वर्ष, संस्करण संख्या और मोनोग्राफ से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे स्वास्थ्य नियमन, दवा गुणवत्ता, रक्त बैंकिंग गुणवत्ता और मानक-निर्धारण में सरकारी संस्थाओं की भूमिका से जोड़ा जा सकता है। RAS और UPSC जैसे पेपरों में यह विषय स्टैटिक जीके के साथ समसामयिकी को जोड़ने वाला उदाहरण है: एक ओर औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 है, दूसरी ओर 2026 में जारी नई मानक पुस्तिका है। इसलिए याद रखने योग्य मूल बिंदु हैं: जारी करने की तारीख 2 जनवरी 2026, 10वां संस्करण, कुल 3,340 मोनोग्राफ, 121 नई मोनोग्राफ, रक्त आधान चिकित्सा के लिए 20 नई मोनोग्राफ और प्रकाशक संस्था भारतीय फार्माकोपिया आयोग।