प्रकाशित: 16 मार्च 2026ISRO / DD Newsविज्ञान-प्रौद्योगिकी
ISRO ने अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान के लिए AIIMS नई दिल्ली के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली, के साथ अंतरिक्ष चिकित्सा में संयुक्त अनुसंधान के लिए एक फ्रेमवर्क समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह अंतरिक्ष वातावरण में मानव स्वास्थ्य पर ISRO और AIIMS के बीच पहला औपचारिक संस्थागत सहयोग है।
यह MoU भारत के गगनयान कार्यक्रम से सीधे जुड़ा है, जो देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (व्योमनॉट्स) को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में भेजने का लक्ष्य रखता है। इस साझेदारी के तहत अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान माइक्रोग्रैविटी और अंतरिक्ष विकिरण वातावरण में अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर केंद्रित होगा, जैसे हृदय संबंधी बदलाव, हड्डी घनत्व में कमी, तरल पदार्थों का स्थानांतरण, प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव और दीर्घकालिक मिशन में मनोवैज्ञानिक तनाव।
MoU के तहत AIIMS नैदानिक चिकित्सा, शरीर विज्ञान, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और पुनर्वास में विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि ISRO सिमुलेशन और वास्तविक अंतरिक्ष स्थितियों का डेटा देगा। संयुक्त अनुसंधान प्रोटोकॉल, अकादमिक प्रशिक्षण और मानव मिशनों के लिए स्वास्थ्य निगरानी प्रौद्योगिकियों का विकास भी प्रस्तावित है।
अंतरिक्ष चिकित्सा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। NASA और ESA जैसी एजेंसियों के समर्पित कार्यक्रम हैं। ISRO-AIIMS साझेदारी भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान स्वास्थ्य के लिए व्यवस्थित ढाँचे वाले देशों में शामिल करती है। इससे टेलीमेडिसिन, दूरस्थ रोगी देखभाल और ICU में भी लाभ होगा।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान पर इसरो-एम्स फ्रेमवर्क समझौता ज्ञापन के महत्व और भारत के गगनयान कार्यक्रम तथा स्थलीय स्वास्थ्य अनुप्रयोगों से इसके संबंध की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
इसरो और एम्स नई दिल्ली ने संयुक्त अंतरिक्ष-चिकित्सा अनुसंधान के लिए पहला औपचारिक फ्रेमवर्क समझौता ज्ञापन किया, जिससे गगनयान मानव मिशन को सीधे मदद मिलेगी। अध्ययन में व्योमनॉट्स की हृदय-संवहनी दुर्बलता, अस्थि-घनत्व में कमी, प्रतिरक्षा परिवर्तन और मनोवैज्ञानिक तनाव पर ध्यान रहेगा। एम्स नैदानिक विशेषज्ञता देगा और इसरो उड़ान-डेटा। लाभ टेलीमेडिसिन व गहन चिकित्सा तक पहुँचेंगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में हस्ताक्षरित ISRO-AIIMS रूपरेखा MoU का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
अंतरिक्ष चिकित्सा में संयुक्त अनुसंधान — अंतरिक्ष यात्रा के स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन, मुख्यतः गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में मदद के लिए।
व्योमनॉट्स कौन हैं?
भारत के गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री, जो निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में जाएंगे।
अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान में अध्ययन की जाने वाली चार स्वास्थ्य चुनौतियाँ बताइए।
हृदय की अवस्था में बदलाव, हड्डियों के घनत्व में कमी, तरल पदार्थों का स्थानांतरण, प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव और माइक्रोग्रैविटी में मनोवैज्ञानिक तनाव।
क्या ISRO-AIIMS सहयोग भारत में अपनी तरह का पहला है?
हाँ, यह अंतरिक्ष वातावरण में मानव स्वास्थ्य पर ISRO और AIIMS के बीच पहला औपचारिक संस्थागत सहयोग है।
अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान धरती पर स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे लाभ पहुँचा सकता है?
अंतरिक्ष में स्वास्थ्य निगरानी के लिए विकसित प्रौद्योगिकियाँ टेलीमेडिसिन, दूर बैठे मरीजों की देखभाल और ICU में उपयोगी हैं।