प्रकाशित: 21 मार्च 2026समाचार स्रोतशासन
IDSP को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जैव-आपातकाल SOP जारी किए
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) को मजबूत करते हुए जैविक आपात स्थितियों से निपटने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) जारी की हैं। ये SOP रोग प्रकोप, महामारी और जैविक खतरों जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में केंद्र-राज्य समन्वय के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करती हैं।
संशोधित IDSP ढांचा जनवरी 2026 में निपाह वायरस के प्रकोप पर हुई कार्रवाई के बाद विकसित किया गया। उस दौरान केंद्रीय और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच समन्वय की कमियां सामने आई थीं। नई SOP में स्थिति को उच्च स्तर पर भेजने के संकेत-बिंदु, संचार पदानुक्रम, प्रयोगशाला पुष्टि की समयसीमा और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राज्य निगरानी इकाइयों (SSU) तथा जिला-स्तरीय त्वरित प्रतिक्रिया दलों के बीच संसाधन तैनाती के प्रोटोकॉल परिभाषित किए गए हैं।
नए ढांचे का एक प्रमुख घटक राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन का क्रियान्वयन है, जिसे PM-STIAC (प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद) और ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की संयुक्त देखरेख में लागू किया जा रहा है। वन हेल्थ दृष्टिकोण मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य निगरानी को एक साथ जोड़ता है।
IDSP मूल रूप से 2004 में शुरू किया गया था और राज्य, जिला तथा परिधीय इकाइयों के नेटवर्क से सभी राज्यों में लागू है। यह कार्यक्रम रोग प्रवृत्तियों को वास्तविक समय में ट्रैक करने के लिए 'S-P-L' रिपोर्टिंग प्रणाली का उपयोग करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IDSP क्या है और जैव-आपातकाल SOP क्यों जारी किए गए?
**एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP)**, जो 2004 में शुरू हुआ था, भारत का रीयल-टाइम रोग निगरानी नेटवर्क है। मार्च 2026 में **जनवरी 2026 के निपाह प्रकोप** के बाद **जैव-आपातकाल SOP** जारी किए गए, जिसमें केंद्र-राज्य समन्वय में कमियां उजागर हुई थीं। ये SOP NCDC, राज्य निगरानी इकाइयों और जिला त्वरित प्रतिक्रिया दलों के बीच एस्केलेशन प्रोटोकॉल और संसाधन परिनियोजन को परिभाषित करती हैं।
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन क्या है और इसकी देखरेख कौन करता है?
**राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन** जूनोटिक रोग खतरों का पता उनके स्रोत पर लगाने के लिए **मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य** निगरानी को एकीकृत करता है। इसे **PM-STIAC** (प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद) और **ICMR** (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की संयुक्त देखरेख में संचालित किया जा रहा है।
IDSP के तहत S-P-L रिपोर्टिंग प्रणाली क्या है?
**S-P-L प्रणाली** का अर्थ है **सिंड्रोमिक, प्रिज़ंप्टिव और लैबोरेटरी** रिपोर्टिंग। यह राज्य, जिला और परिधीय स्वास्थ्य इकाइयों में रीयल-टाइम में रोग प्रवृत्तियों को ट्रैक करती है। नई जैव-आपातकाल SOP इस निगरानी ढांचे के ऊपर एक **संकट समन्वय परत** जोड़ती हैं।
MoHFW के तहत रोग निगरानी के लिए नोडल एजेंसी कौन सी है?
**राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC)**, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के तहत, भारत में रोग निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया के लिए नोडल एजेंसी है। यह IDSP ढांचे के तहत राज्य निगरानी इकाइयों (SSU) और जिला-स्तरीय त्वरित प्रतिक्रिया दलों (RRT) के साथ समन्वय करता है।
वन हेल्थ दृष्टिकोण भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
**वन हेल्थ** दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग **60% उभरते संक्रामक रोग** जूनोटिक हैं — जो जानवरों और मनुष्यों के बीच फैलते हैं। मानव, पशु और पर्यावरण डोमेन में निगरानी को एकीकृत करके, भारत **निपाह, एवियन इन्फ्लूएंजा और मंकीपॉक्स** जैसे खतरों का जल्दी पता लगा सकता है।