केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) को मजबूत करते हुए जैविक आपात स्थितियों से निपटने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) जारी की हैं। ये SOP रोग प्रकोप, महामारी और जैविक खतरों जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में केंद्र-राज्य समन्वय के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करती हैं।

संशोधित IDSP ढांचा जनवरी 2026 में निपाह वायरस के प्रकोप पर हुई कार्रवाई के बाद विकसित किया गया। उस दौरान केंद्रीय और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच समन्वय की कमियां सामने आई थीं। नई SOP में स्थिति को उच्च स्तर पर भेजने के संकेत-बिंदु, संचार पदानुक्रम, प्रयोगशाला पुष्टि की समयसीमा और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राज्य निगरानी इकाइयों (SSU) तथा जिला-स्तरीय त्वरित प्रतिक्रिया दलों के बीच संसाधन तैनाती के प्रोटोकॉल परिभाषित किए गए हैं।

नए ढांचे का एक प्रमुख घटक राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन का क्रियान्वयन है, जिसे PM-STIAC (प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद) और ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की संयुक्त देखरेख में लागू किया जा रहा है। वन हेल्थ दृष्टिकोण मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य निगरानी को एक साथ जोड़ता है।

IDSP मूल रूप से 2004 में शुरू किया गया था और राज्य, जिला तथा परिधीय इकाइयों के नेटवर्क से सभी राज्यों में लागू है। यह कार्यक्रम रोग प्रवृत्तियों को वास्तविक समय में ट्रैक करने के लिए 'S-P-L' रिपोर्टिंग प्रणाली का उपयोग करता है।