साहित्य का 2025 नोबेल पुरस्कार हंगरी के उपन्यासकार लास्लो क्रास्नाहोरकाई को दिया गया। स्वीडिश अकादमी की घोषणा के अनुसार उन्हें यह सम्मान “उनकी सम्मोहक और दूरदर्शी कृतियों” के लिए मिला, जो सर्वनाशी भय के बीच कला की शक्ति की फिर से पुष्टि करती हैं। यह तथ्य परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुरस्कार, लेखक, देश, क्षेत्र और उद्धरण जैसे सीधे तथ्य प्रारंभिक परीक्षा में पूछे जाते हैं।
क्रास्नाहोरकाई का जन्म 1954 में ग्युला, हंगरी में हुआ। वे इमरे केर्तेस के बाद साहित्य का नोबेल पाने वाले हंगरी के दूसरे लेखक हैं। इसलिए यह खबर केवल “किसे पुरस्कार मिला” तक सीमित नहीं है; इससे हंगरी, यूरोपीय साहित्य, नोबेल पुरस्कार और विश्व सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़ा स्टैटिक जीके भी बनता है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में याद रखने का तरीका लेखक-देश-कृति-पुरस्कार है, न कि एक लंबा साहित्यिक निबंध।
उनका चर्चित और निर्णायक उपन्यास सतांटैंगो 1985 में प्रकाशित हुआ। बाद में निर्देशक बेला टार के साथ इसके आधार पर 1994 की प्रसिद्ध फिल्म बनी। क्रास्नाहोरकाई की रचनाओं में उत्तर-आधुनिक, डिस्टोपियन और उदास वातावरण दिखता है, जहां समाज टूटने की कगार पर दिखाई देते हैं। उनकी गद्य-शैली लंबे, बहते हुए वाक्यों के लिए भी पहचानी जाती है।
परीक्षा के लिए याद रखने योग्य बातें साफ हैं: पुरस्कार का क्षेत्र साहित्य है, वर्ष 2025 है, विजेता लास्लो क्रास्नाहोरकाई हैं, देश हंगरी है, प्रमुख कृति सतांटैंगो है और साहित्य का नोबेल पाने वाले पहले हंगरी लेखक इमरे केर्तेस थे। अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की तैयारी में इस तरह की जानकारी को लेखक-देश-कृति-पुरस्कार के छोटे फ्रेम में दोहराना उपयोगी रहता है।
