"विकास, विरासत और नवाचार की बुनाई" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन 2026 असम के गुवाहाटी में 8-9 जनवरी 2026 को आयोजित हुआ। भारत के वस्त्र क्षेत्र की आगे की दिशा तय करने के लिए इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वस्त्र मंत्रियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में भारत का टेक्सटाइल एटलस जारी किया गया। यह विस्तृत दस्तावेज़ देशभर के वस्त्र क्लस्टरों, हथकरघा और हस्तशिल्प परंपराओं, कच्चे माल के उत्पादन क्षेत्रों तथा निर्यात केंद्रों का मानचित्र प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य नीति निर्माताओं, निवेशकों और वस्त्र उद्योग से जुड़े पक्षों को अलग-अलग वस्त्र क्षेत्रों में अवसर पहचानने और ज़रूरी कदमों की योजना बनाने के लिए संदर्भ सामग्री देना है।
पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को प्रमुखता देने के लिए गुवाहाटी को मेजबान शहर चुना गया। सम्मेलन में पूर्वोत्तर पर एक विशेष सत्र भी हुआ, जिसमें एरी, मुगा और मलबेरी रेशम पर ध्यान दिया गया—इन तीनों किस्मों के लिए यह क्षेत्र दुनिया भर में जाना जाता है। केवल असम में बनने वाले मुगा रेशम को GI टैग मिला हुआ है, जो इसके खास भौगोलिक मूल और कारोबारी महत्व को दर्शाता है।
मुख्य चर्चा वस्त्र नीति में सुधार, वस्त्र मूल्य श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की भूमिका तथा मेक इन इंडिया पहल से घरेलू विनिर्माण पर पड़े प्रभाव पर हुई। प्रतिनिधियों ने वस्त्र निर्यात बढ़ाने की रणनीतियों और 2030 तक इसे 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के वस्त्र मंत्रालय के लक्ष्य पर विचार किया।
कौशल विकास, प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (TUFS) के ज़रिए तकनीकी उन्नयन, क्लस्टर विकास और इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने की चुनौतियाँ भी चर्चा में रहीं। राज्यों से कहा गया कि वे अपनी वस्त्र नीतियों को राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप बनाएं और बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (PM MITRA) पार्क योजना का लाभ लें।
