सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक, 2025 को 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। यह ऐतिहासिक कानून परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त करता है तथा छह दशकों में पहली बार भारत के परमाणु कानूनी ढाँचे को समेकित करता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान भारतीय निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के साथ उनके संयुक्त उद्यमों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन, परमाणु ईंधन प्रबंधन एवं उपकरण निर्माण के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की अनुमति देता है। परमाणु सामग्री का संवर्धन, भारी पानी का उत्पादन और प्रयुक्त ईंधन का प्रबंधन केवल सरकार (परमाणु ऊर्जा विभाग) के नियंत्रण में रहेगा। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक स्वतंत्र नियामक का दर्जा दिया गया है। ग्रेडेड दायित्व ढाँचे के तहत देनदारी सीमा ₹100 करोड़ से ₹3,000 करोड़ के बीच होगी। यह कानून 2047 तक परमाणु क्षमता 100 GW तक बढ़ाने और '2070 तक नेट जीरो' लक्ष्य के अनुरूप है। लोकसभा ने 17 दिसंबर और राज्यसभा ने 18 दिसंबर को इसे पारित किया, 20 दिसंबर को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
SHANTI विधेयक 2025 लोकसभा में पेश: भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोला, 63 वर्ष पुराने परमाणु ऊर्जा अधिनियम में बदलाव
सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक, 2025 को 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। यह ऐतिहासिक कानून परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त करता है तथा छह दशकों में पहली बार भारत के परमाणु कानूनी ढाँचे को समेकित करता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान भारतीय निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के साथ उनके संयुक्त उद्यमों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन, परमाणु ईंधन प्रबंधन एवं उपकरण निर्माण के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की अनुमति देता है। परमाणु सामग्री का संवर्धन, भारी पानी का उत्पादन और इस्तेमाल हो चुके ईंधन का प्रबंधन केवल सरकार (परमाणु ऊर्जा विभाग) के नियंत्रण में रहेगा। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक स्वतंत्र नियामक का दर्जा दिया गया है। स्तरीकृत दायित्व ढाँचे के तहत देनदारी सीमा ₹100 करोड़ से ₹3,000 करोड़ के बीच होगी। यह कानून 2047 तक परमाणु क्षमता 100 GW तक बढ़ाने और '2070 तक नेट जीरो' लक्ष्य के अनुरूप है। लोकसभा ने 17 दिसंबर और राज्यसभा ने 18 दिसंबर को इसे पारित किया, 20 दिसंबर को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
मुख्य तथ्य
- SHANTI विधेयक 2025 को 15 दिसंबर 2025 को भारत के परमाणु ऊर्जा ढाँचे में सुधार के लिए लोकसभा में पेश किया गया।
- इसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त किया।
- निजी कंपनियाँ निर्धारित सीमा तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन और यूरेनियम संवर्धन के लिए लाइसेंस प्राप्त कर सकती हैं।
- AERB को स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक के रूप में वैधानिक मान्यता दी गई।
- संयंत्र के प्रकार के आधार पर दायित्व 100 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपये के बीच श्रेणीबद्ध रखा गया है।
- विधेयक लोकसभा (17 दिसंबर), राज्यसभा (18 दिसंबर) से पारित हुआ और 20 दिसंबर को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: शांति विधेयक, 2025 तथा भारत के परमाणु ऊर्जा शासन एवं 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
15 दिसंबर 2025 को पेश शांति विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962, सिविल परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम 2010 को निरस्त करता, उत्पादन और ईंधन प्रबंधन निजी फर्मों के लिए खोलता, एईआरबी को सांविधिक मान्यता देता, दायित्व 100 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपये तक श्रेणीबद्ध करता, भारत के 2047 तक 100-गीगावाट परमाणु लक्ष्य में मदद करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SHANTI का पूर्ण रूप क्या है और यह विधेयक संसद में कब पेश किया गया?
SHANTI विधेयक का मकसद भारत के कायाकल्प के लिए परमाणु ऊर्जा का लगातार इस्तेमाल और विकास करना है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया और 20 दिसंबर को इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली।
SHANTI विधेयक किन मौजूदा कानूनों को निरस्त करता है?
SHANTI विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त करता है। इससे छह दशकों में पहली बार भारत का परमाणु कानूनी ढाँचा एकीकृत हुआ है।
SHANTI विधेयक में निजी क्षेत्र के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव क्या है?
पहली बार SHANTI विधेयक भारतीय निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के साथ उनके संयुक्त उद्यमों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन, परमाणु ईंधन प्रबंधन एवं उपकरण निर्माण के लिए निर्धारित सीमा तक लाइसेंस लेने की अनुमति देता है।
AERB क्या है और SHANTI विधेयक में इसकी क्या भूमिका है?
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) भारत का परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण है। SHANTI विधेयक के तहत इसे स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक के रूप में वैधानिक मान्यता दी गई है, जिससे इसे अधिक स्वायत्तता और कानूनी दर्जा मिला है।
SHANTI विधेयक में परमाणु दायित्व की श्रेणीबद्ध संरचना क्या है?
SHANTI विधेयक में परमाणु संयंत्र के प्रकार और क्षमता के आधार पर 100 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपये तक की श्रेणीबद्ध दायित्व प्रणाली शुरू करने का प्रावधान है। यह नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 की पुरानी एकसमान देयता सीमा की जगह लेती है।
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