राजस्थान उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर 2025 के आसपास राज्य सरकार को जैसलमेर की गड़ीसर झील के लिए विस्तृत जवाब और संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गड़ीसर (गड़सीसर) 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है, जिसे महारावल गड़सी सिंह ने अपने शुष्क क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनवाया था। यह सदियों तक जैसलमेर शहर का मुख्य जल स्रोत रहा है और मंदिरों, स्मारकों (छतरियों) और घाटों से घिरा स्थापत्य का अनूठा उदाहरण है। झील का जलग्रहण क्षेत्र अतिक्रमण, शहरी दबाव, गाद और बिना उपचार वाले सीवेज से होने वाले प्रदूषण के कारण तेजी से सिकुड़ गया है। सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों सहित महत्वपूर्ण स्थानीय जैव विविधता को यह झील सहारा देती है। उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिक समाज की याचिकाओं के बाद हुआ। राजस्थान में 562 अधिसूचित जल निकाय हैं, जिनमें से अनेक अतिक्रमण और उपेक्षा जैसे खतरों से जूझ रहे हैं।
जैसलमेर की गड़ीसर झील: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को 14वीं सदी के संकटग्रस्त जलाशय के संरक्षण की योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर 2025 के आसपास राज्य सरकार को जैसलमेर की गड़ीसर झील के लिए विस्तृत प्रतिक्रिया और संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गड़ीसर (गड़सीसर) 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है, जिसे महारावल गड़सी सिंह ने अपने शुष्क क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनवाया था। यह सदियों तक जैसलमेर शहर का प्राथमिक जल स्रोत रहा है और मंदिरों, स्मारकों (छतरियों) और घाटों से घिरा स्थापत्य की दृष्टि से अद्भुत स्थल है। झील का जलग्रहण क्षेत्र अतिक्रमण, शहरी दबाव, गाद और अनुपचारित सीवेज प्रदूषण से तेजी से सिकुड़ गया है। सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों सहित यहां महत्वपूर्ण स्थानीय जैव विविधता मिलती है। उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिक समाज की याचिकाओं के बाद हुआ। राजस्थान में 562 अधिसूचित जल निकाय हैं, जिनमें से अनेक अतिक्रमण और उपेक्षा से इसी तरह के खतरों का सामना कर रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान उच्च न्यायालय ने जैसलमेर की गड़ीसर झील के संरक्षण की योजना बनाने का निर्देश दिया।
- अतिक्रमण और बिना उपचार वाले सीवेज के कारण झील का जलग्रहण क्षेत्र तेजी से सिकुड़ा है।
- सर्दियों में प्रवासी पक्षियों को आश्रय देने के कारण यह पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है।
- पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज की याचिकाओं के कारण न्यायालय ने हस्तक्षेप किया।
- पुष्कर, आनासागर और साम्भर सहित राजस्थान की विरासत झीलें भी समान खतरों का सामना कर रही हैं।
- राजस्थान में 562 अधिसूचित जल निकाय हैं जिनमें से अनेक अतिक्रमण और उपेक्षा झेल रहे हैं।
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स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गड़ीसर झील क्या है और इसे किसने बनवाया था?
गड़ीसर झील जैसलमेर, राजस्थान में स्थित 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है। इसे 14वीं सदी में महारावल गड़सी सिंह ने इस शुष्क क्षेत्र की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनवाया था। यह सदियों तक शहर का मुख्य जल स्रोत रहा।
गड़ीसर झील के संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय ने क्या कार्रवाई की?
19 नवंबर 2025 के आसपास राजस्थान उच्च न्यायालय ने पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज की याचिकाओं के बाद राज्य सरकार को गड़ीसर झील के लिए विस्तृत जवाब और संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
गड़ीसर झील के सामने प्रमुख खतरे क्या हैं?
अतिक्रमण, शहरी दबाव, गाद और अनुपचारित सीवेज के कारण झील का जलग्रहण क्षेत्र तेजी से सिकुड़ा है। इन खतरों ने इसके पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है।
गड़ीसर झील का पारिस्थितिक महत्व क्या है?
गड़ीसर झील सर्दियों में प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है जिससे यह पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र बनती है। मंदिरों, छतरियों और घाटों से घिरी यह झील स्थापत्य कला का भी अनूठा उदाहरण है।
राजस्थान में कितने अधिसूचित जल निकाय हैं और उनके सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
राजस्थान में 562 अधिसूचित जल निकाय हैं जिनमें से अनेक अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार हैं। पुष्कर, आनासागर और साम्भर जैसी विरासत झीलें भी गड़ीसर झील जैसे खतरों का सामना कर रही हैं।
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