वैश्विक MPI 2025: भारत ने 41.4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला; 99% गरीब जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में
Aसीधा उत्तर
वैश्विक MPI 2025: भारत में गरीबी 55.1% से घटकर 16.4% हुई, 41.4 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले; लेकिन 99% गरीब जलवायु खतरों से ग्रस्त।
मुख्य तथ्य
UNDP और Oxford Poverty and Human Development Initiative (OPHI) ने Global MPI 2025 जारी किया, जिसका शीर्षक 'Overlapping Hardships: Poverty and Climate Hazards' है
वैश्विक स्तर पर 109 देशों में 1.1 अरब लोग (18.3%) गंभीर बहुआयामी गरीबी में रहते हैं, जिनमें 51% बच्चे हैं
भारत में बहुआयामी गरीबी 55.1% (2005-06) से घटकर 16.4% (2019-21) रह गई, जिससे 41.4 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले; यह वैश्विक स्तर पर सबसे तेज गिरावटों में से एक है
भारत के लगभग 99% गरीब ऐसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं, जो लू, बाढ़ और वायु प्रदूषण से प्रभावित होते हैं
भारत में गरीबी घटने में PM-Awas Yojana, Swachh Bharat Mission, Ujjwala और Jal Jeevan Mission जैसी लक्षित योजनाओं की भूमिका रही
UNDP और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (OPHI) ने वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2025 'एक साथ झेली जा रही कठिनाइयां: गरीबी और जलवायु खतरे' शीर्षक से जारी किया। दुनिया भर में 109 देशों में 1.1 अरब लोग (18.3%) तीव्र बहुआयामी गरीबी में हैं। बच्चे बहुआयामी गरीबों का 51% हैं।
भारत ने बहुआयामी गरीबी में 55.1% (2005-06) से 16.4% (2019-21) तक उल्लेखनीय गिरावट हासिल की और 41.4 करोड़ से अधिक लोगों को वंचना से बाहर निकाला — यह दुनिया की सबसे तेज कमियों में से एक है। हालांकि, भारत के 99% गरीब लू, बाढ़ और वायु प्रदूषण जैसे जलवायु जोखिमों से प्रभावित क्षेत्रों में हैं। यह सफलता PM-आवास, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला और जल जीवन मिशन जैसी लक्षित योजनाओं का प्रतिफल है।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2025 भारत में गरीबी घटने के साथ जलवायु-संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। इसके निष्कर्षों और जलवायु-प्रभावित क्षेत्रों में कल्याणकारी नीतियों पर पड़ने वाले प्रभावों की परीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
यूएनडीपी-ओपीएचआई वैश्विक एमपीआई 2025 'ओवरलैपिंग हार्डशिप्स' ने बताया कि भारत में बहुआयामी गरीबी 2005-06 के 55.1 प्रतिशत से घटकर 2019-21 में 16.4 प्रतिशत रह गई, और 41.4 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए। 109 देशों में 1.1 अरब गरीब हैं। फिर भी भारत के 99 प्रतिशत गरीब जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं।
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वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2025 के अनुसार, 2005-06 और 2019-21 के बीच भारत की बहुआयामी गरीबी दर 55.1% से घटकर लगभग किस स्तर पर आ गई?
व्याख्या · सही उत्तर B
भारत में बहुआयामी गरीबी 55.1% (2005-06) से घटकर 16.4% (2019-21) रह गई। इस गिरावट से 41.4 करोड़ से अधिक लोग वंचना से बाहर आए। फिर भी भारत के लगभग 99% गरीब जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं। बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2025 को यूएनडीपी और ओपीएचआई ने संयुक्त रूप से जारी किया।
ग्लोबल MPI 2025 के अनुसार भारत ने कितने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला?
**ग्लोबल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) 2025** के अनुसार, भारत ने 15 वर्षों (2005-06 से 2019-21) में **41.4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर** निकाला, जो इतिहास में सबसे बड़ी गरीबी उन्मूलन उपलब्धियों में से एक है।
ग्लोबल MPI 2025 के अनुसार भारत के कितने प्रतिशत गरीब जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं?
**ग्लोबल MPI 2025** में पाया गया कि **भारत के 99% गरीब जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों** में रहते हैं। यह गरीबी और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता के आपसी संबंध को एक बड़ी विकास चुनौती के रूप में रेखांकित करता है।
ग्लोबल MPI क्या है और इसे कौन प्रकाशित करता है?
**ग्लोबल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI)** **UNDP और ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI)** द्वारा वार्षिक रूप से प्रकाशित किया जाता है।
वैश्विक स्तर पर भारत की 41.4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की उपलब्धि का क्या मतलब है?
2005-06 से 2019-21 के बीच **41.4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना** PM-KISAN, PMAY और उज्ज्वला योजना जैसे कार्यक्रमों के कारण वैश्विक स्तर पर **सबसे तेज और सबसे बड़ी गरीबी उन्मूलन उपलब्धियों** में से एक के रूप में उद्धृत किया जाता है।
ग्लोबल MPI 2025 भारत के लिए जलवायु-गरीबी संबंध के बारे में क्या बताता है?
ग्लोबल MPI 2025 बताता है कि **भारत के शेष 99% गरीब जलवायु के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं**, यानी जलवायु परिवर्तन गरीबी उन्मूलन से मिले लाभों को सीधे खतरे में डालता है।
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