राजस्थान के बूंदी जिले में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में फिशिंग कैट पहली बार कैमरा ट्रैप में दर्ज हुई। यह रिकॉर्ड रामगढ़ रेंज में नियमित बाघ निगरानी के दौरान रिजर्व के फील्ड बायोलॉजिस्ट और दलेलपुरा टाइगर ट्रैकिंग टीम के संयुक्त काम से मिला। परीक्षा में यह रिकॉर्ड राजस्थान की जैव विविधता, संरक्षित क्षेत्रों और आर्द्रभूमि-आधारित वन्यजीवों के उदाहरण के रूप में उपयोगी है। फिशिंग कैट एक छोटी जंगली बिल्ली है, जिसका वैज्ञानिक नाम प्रियोनेलुरस विवेरिनस है। यह आम तौर पर आर्द्रभूमि और नदी-तटीय आवासों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए रामगढ़ विषधारी में इसका मिलना सिर्फ किसी नई प्रजाति का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि रिजर्व के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत भी है।

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व राजस्थान का चौथा और भारत का 52वां टाइगर रिजर्व है। राजस्थान वन विभाग के रिकॉर्ड में इसकी अधिसूचना 30.05.2022 की है, जबकि 2022 में प्रकाशित रिपोर्टों में इसे बूंदी, भीलवाड़ा और कोटा जिलों में फैला संरक्षित परिदृश्य बताया गया। यह रणथंभौर और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव गलियारे के रूप में भी महत्त्वपूर्ण है। छोटे मांसाहारी जीवों के संदर्भ में यह रिकॉर्ड इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि रिजर्व में पहले जंगल कैट, रस्टी-स्पॉटेड कैट, एशियाई वाइल्डकैट और कैराकल दर्ज थे; फिशिंग कैट के साथ ऐसी प्रजातियों की संख्या 5 बताई गई।

प्रीलिम्स में इससे स्थान, प्रजाति, संरक्षण दर्जा और टाइगर रिजर्व से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। फिशिंग कैट आईयूसीएन रेड लिस्ट में वल्नरेबल श्रेणी में है और भारत में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत उच्च कानूनी संरक्षण पाती है। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण राजस्थान में आवास संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और आर्द्रभूमि प्रबंधन के महत्त्व को समझाने के लिए उपयोगी है।