प्रकाशित: 26 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
शांति अधिनियम और वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025: भारत ने परमाणु क्षेत्र का निजीकरण किया, ग्रामीण रोजगार गारंटी में सुधार
संसद के शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) में दो ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए, जिन्हें 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली: शांति (SHANTI) अधिनियम और वीबी-जी रैम जी (VB-G RAM G) अधिनियम।
शांति अधिनियम 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम का स्थान लेता है और परमाणु क्षेत्र में छह दशकों से चले आ रहे राज्य एकाधिकार को समाप्त करता है। इस कानून के तहत निजी कंपनियाँ, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के कड़े सुरक्षा नियमों और लाइसेंसिंग के अधीन, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में निवेश और संचालन कर सकेंगी। इसका उद्देश्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को गति देना है। वर्तमान में भारत के 22 रिएक्टर लगभग 7,480 MW बिजली उत्पन्न करते हैं। निजी पूँजी और तकनीकी विशेषज्ञता से निवेश की कमी को पूरा करने की उम्मीद है।
वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2005 के मनरेगा का स्थान लेता है। इसमें प्रति परिवार गारंटीकृत कार्यदिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है और केंद्र-राज्य के बीच लागत साझा करने का अनुपात 60:40 किया गया है। नई योजना में हरित बुनियादी ढाँचे — जैसे खेत तालाब, जलग्रहण प्रबंधन और सौर ऊर्जा से जुड़े कार्य — शामिल किए गए हैं और ग्राम पंचायतों की भूमिका को मजबूत किया गया है। दोनों अधिनियम भारतीय शासन में एक संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2025 के शांति अधिनियम एवं वीबी-जी रैम जी अधिनियम द्वारा लाए गए संरचनात्मक बदलावों पर चर्चा कीजिए, बताइए कि वे परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी एवं ग्रामीण रोजगार गारंटी को किस प्रकार पुनर्परिभाषित करते हैं।
उत्तर (50 शब्द):
दोनों अधिनियमों को 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति स्वीकृति मिली। शांति अधिनियम 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम की जगह लेता है और 2047 तक 100 गीगावाट के लिए नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारों के लिए खोलता है। वीबी-जी रैम जी अधिनियम मनरेगा की जगह लेता है, कार्यदिवस 100 से 125 करता है और केंद्र-राज्य 60:40 तय करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शांति अधिनियम किसकी जगह लेता है और इसका मुख्य सुधार क्या है?
शांति अधिनियम 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम की जगह लेता है, जिसके तहत भारत के परमाणु क्षेत्र में छह दशकों से राज्य का एकाधिकार बना हुआ था। इसका मुख्य सुधार नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना है, ताकि वे AERB लाइसेंसिंग के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में निवेश और संचालन कर सकें।
नई परमाणु नीति के तहत भारत की परमाणु क्षमता का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है। दिसंबर 2025 में डीएई ने वर्तमान स्थापित परमाणु क्षमता 8,780 मेगावाट बताई, जिसमें आरएपीएस-1 शामिल नहीं है। शांति अधिनियम इस लक्ष्य के लिए निजी पूँजी आकर्षित करने की व्यवस्था करता है।
वीबी-जी रैम जी मनरेगा से किस प्रकार भिन्न है?
वीबी-जी रैम जी मनरेगा की जगह लेता है और गारंटीकृत कार्यदिवसों को 100 से बढ़ाकर प्रति परिवार 125 करता है। इसमें केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 रखा गया है, हरित बुनियादी ढाँचे को शामिल किया गया है और ग्राम पंचायत की भूमिका को मजबूत किया गया है।
वीबी-जी रैम जी में 60:40 केंद्र-राज्य अनुपात का क्या महत्व है?
60:40 अनुपात का अर्थ है कि केंद्र सरकार 60% लागत वहन करती है और राज्य 40% वहन करते हैं। यह मनरेगा की मौजूदा लागत-साझाकरण संरचना में बदलाव है, जिसका उद्देश्य राज्यों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करना है।
दोनों अधिनियमों को राष्ट्रपति की स्वीकृति कब मिली और किस संसदीय सत्र में?
शांति अधिनियम और वीबी-जी रैम जी अधिनियम दोनों को शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) के दौरान 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।