संसद के शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) में दो ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए, जिन्हें 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली: शांति (SHANTI) अधिनियम और वीबी-जी रैम जी (VB-G RAM G) अधिनियम।

शांति अधिनियम 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम का स्थान लेता है और परमाणु क्षेत्र में छह दशकों से चले आ रहे राज्य एकाधिकार को समाप्त करता है। इस कानून के तहत निजी कंपनियाँ, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के कड़े सुरक्षा नियमों और लाइसेंसिंग के अधीन, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में निवेश और संचालन कर सकेंगी। इसका उद्देश्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को गति देना है। वर्तमान में भारत के 22 रिएक्टर लगभग 7,480 MW बिजली उत्पन्न करते हैं। निजी पूँजी और तकनीकी विशेषज्ञता से निवेश की कमी को पूरा करने की उम्मीद है।

वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2005 के मनरेगा का स्थान लेता है। इसमें प्रति परिवार गारंटीकृत कार्यदिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है और केंद्र-राज्य के बीच लागत साझा करने का अनुपात 60:40 किया गया है। नई योजना में हरित बुनियादी ढाँचे — जैसे खेत तालाब, जलग्रहण प्रबंधन और सौर ऊर्जा से जुड़े कार्य — शामिल किए गए हैं और ग्राम पंचायतों की भूमिका को मजबूत किया गया है। दोनों अधिनियम भारतीय शासन में एक संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक हैं।