सरकार ने भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में सतत मत्स्य पालन नियम अधिसूचित किए
Aसीधा उत्तर
भारत ने EEZ में सतत मत्स्य पालन के नियम अधिसूचित किए: डिजिटल पास, सहकारी समितियों को प्राथमिकता और हानिकारक प्रथाओं पर रोक।
मुख्य तथ्य
सरकार ने 4 नवंबर, 2025 को 'विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य पालन का सतत दोहन' के लिए नियम अधिसूचित किए।
इसका उद्देश्य भारत की 11,099 किलोमीटर तटरेखा और 20.2 लाख वर्ग किलोमीटर EEZ की क्षमता का पूरा उपयोग करना है।
मुख्य प्रावधान: मछुआरा सहकारी समितियों और एफएफपीओ को प्राथमिकता; ReALCRaft पोर्टल से पूरी तरह डिजिटल 'एक्सेस पास'।
एलईडी लाइट से मछली पकड़ने, जोड़ी वाली ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया गया; विदेशी जहाजों पर भी रोक लगाई गई।
अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीपों के लिए 'मां और बच्चा' पोत मॉडल, जो भारत के EEZ का 49% हिस्सा हैं; 50 लाख से अधिक मछुआरों को लाभ होगा।
भारत सरकार ने 4 नवंबर 2025 को 'विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य पालन के सतत दोहन' के नियम अधिसूचित किए। इन नियमों का लक्ष्य भारत की 11,099 किमी तटरेखा और 20.2 लाख वर्ग किमी EEZ की क्षमता का सतत उपयोग करना है।
प्रमुख प्रावधानों में: मछुआरा सहकारी समितियों और FFPOs को प्राथमिकता; ReALCRaft पोर्टल से डिजिटल 'एक्सेस पास' प्रणाली; LED लाइट फिशिंग, पेयर ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक प्रथाओं पर प्रतिबंध; विदेशी जहाजों पर रोक; और अंडमान-निकोबार व लक्षद्वीप के लिए मदर-एंड-चाइल्ड वेसल मॉडल शामिल हैं। इस पहल से 50 लाख से अधिक मछुआरों को लाभ होगा।
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मेन्स दृष्टिकोण
उत्तर (50 शब्द):
4 नवंबर 2025 को भारत ने विशेष आर्थिक क्षेत्र में सतत मत्स्य पालन नियम अधिसूचित किए, जो 20.2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर लागू हैं। डिजिटल प्रवेश पास से सहकारी समितियों एवं मत्स्य उत्पादक संगठनों को प्राथमिकता मिलेगी; हानिकारक ट्रॉलिंग पर रोक से देशभर में पचास लाख मछुआरों को लाभ होगा।
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विशेष आर्थिक क्षेत्र में सतत मत्स्य पालन के नियम कब अधिसूचित किए गए और वे किन संसाधनों के उपयोग पर केंद्रित हैं?
भारत सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के नियम 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए। इनका लक्ष्य भारत की 11,099 किलोमीटर तटरेखा और 20.2 लाख वर्ग किलोमीटर विशेष आर्थिक क्षेत्र की क्षमता का उपयोग करना है।
नियमों के तहत किन मत्स्य समूहों को प्राथमिकता दी गई है?
नियमों में मछुआरा सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों को प्राथमिकता दी गई है।
प्रवेश का प्रबंधन कैसे होगा और कौन-सी पद्धतियां या पोत प्रतिबंधित हैं?
प्रवेश का प्रबंधन रीअलक्राफ्ट पोर्टल से पूरी तरह डिजिटल प्रवेश-पास प्रणाली के ज़रिए होगा। नियमों में एलईडी प्रकाश से मछली पकड़ने, जोड़ी ट्रॉलिंग, बुल ट्रॉलिंग और विदेशी पोतों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
कौन सा द्वीपीय पोत मॉडल शामिल है और किसे लाभ मिलने की उम्मीद है?
अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीपों के लिए माता-शिशु पोत मॉडल शामिल है, जिनका भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में 49% हिस्सा है। इस पहल से देशभर के 50 लाख से अधिक मछुआरों को लाभ होगा।
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