नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 15 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति अधिसूचित की, जो भू-तापीय ऊर्जा के दोहन के लिए भारत का पहला व्यापक नीतिगत ढाँचा है। भारत में लगभग 10,600 मेगावाट की अनुमानित सैद्धांतिक भू-तापीय संसाधन क्षमता है और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा अन्य क्षेत्रों में 381 गर्म जल स्रोतों की पहचान की है।

नीति में कहा गया है कि सरकार सक्षम प्राधिकारियों की मंजूरी के अधीन जीएसटी और आयात शुल्क छूट, कर अवकाश, त्वरित मूल्यह्रास, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और रियायती ऋण जैसे सहायता उपायों पर विचार कर सकती है। नीति बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है और भू-तापीय तथा सौर ऊर्जा की संकर प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जाता है। विकासकर्ताओं को अन्वेषण परमिट और 30 वर्ष तक के दीर्घकालिक विकास आवंटन मिल सकते हैं।