नोबेल रसायन पुरस्कार 2025 संयुक्त रूप से सुसुमु किटागावा (क्योटो विश्वविद्यालय, जापान), रिचर्ड रॉब्सन (मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया) और ओमर एम. याघी (UC बर्कले, USA) को 'मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क के विकास' के लिए दिया गया। घोषणा 8 अक्टूबर 2025 को हुई।

मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs) ऐसी आणविक संरचनाएँ हैं जिनमें बड़े-बड़े छिद्रयुक्त स्थान होते हैं और उनसे गैसें तथा रसायन गुजर सकते हैं। MOFs का उपयोग रेगिस्तानी हवा से पानी एकत्र करने, CO2 कैप्चर, विषैली गैसों के भंडारण और रासायनिक अभिक्रियाओं के उत्प्रेरण में होता है। भारत की CSIR प्रयोगशालाएँ MOF-आधारित CO2 कैप्चर प्रणालियों पर कार्यरत हैं।