अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 'टिकाऊ ईंधन वितरण: 2035 तक के मार्ग' रिपोर्ट जारी की है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि 2035 तक दुनिया में टिकाऊ ईंधन का उपयोग चार गुना हो सकता है। अभी टिकाऊ ईंधनों से वैश्विक तेल मांग में रोजाना लगभग 25 लाख बैरल की कमी आती है। अनुमानित संचयी निवेश 1.5 लाख करोड़ डॉलर है, जिससे विश्व स्तर पर लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी।

भारत इस बदलाव में प्रमुख भूमिका निभाने की स्थिति में है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन 2030 तक 50 लाख टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है और इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने पेट्रोल में 2025 में 20% इथेनॉल मिश्रण समय से पहले हासिल कर लिया है। राजस्थान पश्चिमी जिलों में जेट्रोफा और अरंडी की खेती के आधार पर जैव ईंधन उत्पादन का प्रमुख राज्य बन रहा है।