भारत ने 2047 तक ब्रह्मपुत्र बेसिन की 76 GW से अधिक जलविद्युत क्षमता का दोहन करने के लिए ₹6.4 लाख करोड़ (77 अरब डॉलर) की पारेषण योजना पेश की। इस योजना में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों की 208 बड़ी जलविद्युत परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं।

बुनियादी ढाँचे की इस व्यापक योजना में पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने वाले उच्च-वोल्टेज पारेषण गलियारे शामिल हैं। इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी। चीन, भारत और बांग्लादेश में फैले ब्रह्मपुत्र बेसिन में जलविद्युत की अपार क्षमता है, जिसका अभी पूरा उपयोग नहीं हुआ है। यह योजना 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने की भारत की रणनीति का हिस्सा है।