भारत और पाकिस्तान ने 1 जनवरी 2026 को परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमले की रोकथाम के द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूचियों का 35वां लगातार वार्षिक आदान-प्रदान पूरा किया। यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित और 27 जनवरी 1991 को लागू हुआ था। इसके अनुसार दोनों देशों को प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान करना होता है। यह आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक माध्यमों से हुआ। यह समझौता दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच बचे हुए कुछ विश्वास-निर्माण उपायों (CBMs) में से एक है और 1992 से लगातार जारी है — कारगिल युद्ध (1999), संसद हमला संकट (2001) और पुलवामा-बालाकोट प्रकरण (2019) जैसे तनावपूर्ण दौर में भी। 35वां आदान-प्रदान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति और सीमापार आतंकवाद की चिंताओं के बीच जारी तनावपूर्ण भारत-पाकिस्तान संबंधों की पृष्ठभूमि में हुआ। इसी राजनयिक माध्यम से पाकिस्तान ने भारत के साथ पाकिस्तानी जेलों में बंद 257 भारतीय कैदियों — नागरिकों और मछुआरों — की सूची भी साझा की।
भारत-पाकिस्तान ने 1988 समझौते के तहत लगातार 35वीं बार परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया
1988 समझौते के तहत 1 जनवरी 2026 को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूचियों का 35वां वार्षिक आदान-प्रदान हुआ। पाकिस्तान ने पाकिस्तानी जेलों में बंद 257 भारतीय कैदियों की सूची भी साझा की।
मुख्य तथ्य
- 1 जनवरी 2026 को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूचियों का लगातार 35वां वार्षिक आदान-प्रदान पूरा हुआ।
- यह आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की रोकथाम संबंधी 1988 के समझौते के तहत हुआ, जो 1991 में लागू हुआ था।
- दोनों देश हर 1 जनवरी को नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक स्तर पर सूचियां साझा करते हैं।
- यह क्रम 1992 से लगातार जारी है, कारगिल, संसद हमला और पुलवामा-बालाकोट जैसे प्रमुख द्विपक्षीय संकटों के बावजूद।
- पाकिस्तान ने पाकिस्तानी जेलों में 257 भारतीय कैदियों (नागरिकों और मछुआरों) की सूची भी साझा की।
- यह परमाणु हथियार रखने वाले दोनों देशों के बीच बचे हुए कुछ विश्वास-निर्माण उपायों (CBMs) में से एक है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 1988 के भारत-पाकिस्तान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध समझौते का विश्वास-बहाली उपाय के रूप में महत्व बताइए।
उत्तर (50 शब्द): 1 जनवरी 2026 को 35वें लगातार आदान-प्रदान ने 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित और 27 जनवरी 1991 से प्रभावी द्विपक्षीय समझौते की पुष्टि की। यह प्रक्रिया 1992 से कारगिल, संसद हमला और पुलवामा संकटों के दौरान भी जारी रही। दो परमाणु पड़ोसियों के बीच बचे हुए विश्वास-बहाली उपायों में से एक यह समझौता रणनीतिक संयम सुनिश्चित करता है।
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स्रोत: MEA/PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत और पाकिस्तान किस समझौते के तहत हर साल परमाणु प्रतिष्ठानों की सूचियों का आदान-प्रदान करते हैं?
भारत-पाकिस्तान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की रोकथाम समझौते के तहत सूचियां साझा करते हैं, जिस पर 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षर हुए और जो 27 जनवरी 1991 से प्रभावी है। इसके तहत दोनों देश प्रत्येक 1 जनवरी को नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक माध्यम से सूचियां साझा करते हैं।
भारत-पाकिस्तान ने कितनी बार परमाणु सूचियों का आदान-प्रदान किया और कब से?
1 जनवरी 2026 को **लगातार 35वां वार्षिक आदान-प्रदान** पूरा हुआ। यह सिलसिला **1992** से शुरू हुआ (जब समझौता 1991 में लागू हुआ) और बिना रुकावट जारी है — **कारगिल युद्ध (1999)**, **संसद हमला (2001)** और **पुलवामा-बालाकोट (2019)** जैसे संकटों के दौरान भी।
जनवरी 2026 में पाकिस्तान ने परमाणु सूची के साथ और क्या जानकारी साझा की?
परमाणु सूचियों के आदान-प्रदान के साथ-साथ **पाकिस्तान ने 257 भारतीय कैदियों** — नागरिकों और मछुआरों — की सूची साझा की, जो पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। यह 1 जनवरी 2026 को उसी राजनयिक माध्यम से हुआ।
CBM के रूप में परमाणु सूची आदान-प्रदान का क्या महत्व है?
यह आदान-प्रदान परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसियों के बीच **कुछ बचे हुए विश्वास-निर्माण उपायों (CBMs)** में से एक है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संघर्ष के दौरान भी परमाणु प्रतिष्ठान हमले से सुरक्षित रहें, जिससे परमाणु तनाव बढ़ने का खतरा कम होता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच अन्य संचार तंत्र कौन से हैं?
परमाणु सूचियों के आदान-प्रदान के अलावा भारत और पाकिस्तान के बीच अन्य संचार तंत्रों में **DGMO हॉटलाइन** (सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच), **सिंधु जल संधि** तंत्र (स्थायी सिंधु आयोग) और कैदियों के कल्याण के लिए कांसुलर चैनल शामिल हैं।
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