भारत के दवा उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि अमेरिका ने 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ़ लगा दिया है। जेनेरिक दवाओं को अभी इससे छूट मिली हुई है, लेकिन इस कदम से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।

भारत 200 से अधिक देशों को जेनेरिक दवाएँ भेजता है और उसके फ़ार्मा निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 31.35% है। भारतीय जेनेरिक दवाओं से 2022 में अमेरिका के स्वास्थ्य-सेवा खर्च में $219 अरब की बचत हुई और अमेरिका में लिखे जाने वाले 90% से अधिक नुस्खों में इनका इस्तेमाल होता है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत का फ़ार्मा निर्यात $30.45 अरब रहा। वैश्विक जेनेरिक दवा बाज़ार 2030 तक $614 अरब तक पहुँचने का अनुमान है। अलग से, 22 सितंबर से लागू GST युक्तिकरण के तहत कई दवाओं पर कर 12% से घटाकर 5% या शून्य कर दिया गया।