अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, भुगतान संतुलन, विदेशी सहायता एवं निवेश
मुख्य तथ्य
- - माल निर्यात: $437 अरब; माल आयात: $677 अरब — माल व्यापार घाटा: ~$240 अरब — कुल व्यापार (माल + सेवाएँ) $1.6 खरब से अधिक
- - 2023–24 CAD: $23.2 अरब (GDP का 0.7%) — प्रबंधनीय स्तर में — टिकाऊ सीमा: ~2–3% GDP — कारण: तेल आयात (~$232 अरब) और सोने के आयात (~$45 अरब)
- - $648 अरब (अप्रैल 2025) — चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद विश्व में चौथा — वर्तमान आयात दर पर 11 महीने के आयात को कवर करता है
- - FDI: प्रबंधन नियंत्रण (≥10% इक्विटी) के साथ दीर्घकालिक निवेश — FII/FPI: नियंत्रण के बिना प्रतिभूतियों (शेयर, बॉन्ड) में अल्पकालिक निवेश
- - पेट्रोलियम उत्पाद: $96 अरब | इंजीनियरिंग माल: $109 अरब | फार्मा: $28 अरब — जेम्स/ज्वेलरी: $40 अरब | IT/सॉफ्टवेयर सेवाएँ: $227 अरब
मुख्य बिंदु
- 1
- माल निर्यात: $437 अरब; माल आयात: $677 अरब
- माल व्यापार घाटा: ~$240 अरब
- कुल व्यापार (माल + सेवाएँ) $1.6 खरब से अधिक
- भारत 8वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक देश
- 2
- देश को उन वस्तुओं में विशेषज्ञता करनी चाहिए जहाँ अवसर लागत अपेक्षाकृत कम हो
- लागू होता है भले ही दूसरे देश को सभी वस्तुओं में पूर्ण लाभ हो
- मुक्त व्यापार और WTO का सैद्धांतिक आधार
- भारत के लाभ: IT सेवाएँ, फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र, जेम्स/ज्वेलरी
- 3
- देश और शेष विश्व के बीच सभी आर्थिक लेनदेन का व्यवस्थित रिकॉर्ड
- चालू खाता: माल, सेवाओं, आय और अंतरण का व्यापार
- पूंजी एवं वित्तीय खाता: FDI, FII, ऋण और भंडार में बदलाव
- लेखांकन दृष्टि से BoP हमेशा संतुलित रहता है
- 4
- 2023–24 CAD: $23.2 अरब (GDP का 0.7%) — प्रबंधनीय स्तर में
- टिकाऊ सीमा: ~2–3% GDP
- कारण: तेल आयात (
$232 अरब) और सोने के आयात ($45 अरब) - आंशिक ऑफसेट: सॉफ्टवेयर सेवा अधिशेष (
$147 अरब) और प्रेषण ($120 अरब)
- 5
- $648 अरब (अप्रैल 2025) — चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद विश्व में चौथा
- वर्तमान आयात दर पर 11 महीने के आयात को कवर करता है
- 3-महीने की न्यूनतम सुरक्षा सीमा से काफी अधिक
- RBI बाजार स्थिरीकरण योजना (MSS) से भंडार प्रबंधन
- 6
- FDI: प्रबंधन नियंत्रण (≥10% इक्विटी) के साथ दीर्घकालिक निवेश
- FII/FPI: नियंत्रण के बिना प्रतिभूतियों (शेयर, बॉन्ड) में अल्पकालिक निवेश
- 2023–24 में $70.9 अरब FDI प्राप्त
- FPI प्रवाह अधिक अस्थिर — अचानक पलट सकते हैं ("हॉट मनी")
- 7
- पेट्रोलियम उत्पाद: $96 अरब | इंजीनियरिंग माल: $109 अरब | फार्मा: $28 अरब
- जेम्स/ज्वेलरी: $40 अरब | IT/सॉफ्टवेयर सेवाएँ: $227 अरब
- भारत जेनेरिक दवाओं का विश्व का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता — वैश्विक जेनेरिक निर्यात का 20%
- 8
- कच्चा तेल: $218 अरब | सोना: $45 अरब | इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: $80 अरब | कोयला: $22 अरब
- व्यापार एकाग्रता जोखिम: शीर्ष 3 आयात (पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना) = कुल आयात बिल का 50%+
- 9
- भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता — 2023–24 में $120 अरब (विश्व बैंक)
- विदेशी मुद्रा स्रोत के रूप में प्रेषण FDI से अधिक
- शीर्ष स्रोत: USA (23%), UAE (18%), UK, सिंगापुर, कुवैत
- FPI या FDI से अधिक स्थिर — कम अस्थिर
- 10
- सक्रिय FTA: ASEAN (2010), दक्षिण कोरिया (2010), जापान (2011), UAE (2022, CEPA), ऑस्ट्रेलिया (2022, ECTA)
- बातचीत जारी: UK, कनाडा, EU, GCC
- चीनी माल की बाढ़ की चिंता से 2019 में RCEP से बाहर निकला
- 11
- निर्यात ऋण, विदेशी मुद्रा ऋण और परियोजना निर्यात वित्त प्रदान करता है
- विकासशील देशों को ऋण सीमाओं (LOC) के जरिए भारत की विदेशी सहायता में सहयोग
- फोकस क्षेत्र: अफ्रीका, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया
- संचयी LOC: 63+ देशों को $30+ अरब
- 12
भारत के निर्यात लक्ष्य और विदेश व्यापार नीति 2023–28
- भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 2 खरब डॉलर के कुल निर्यात (माल + सेवाएँ) तक पहुँचना है
- विदेश व्यापार नीति 2023–28 (31 मार्च 2023 को शुरू) का ध्यान: जिलों से निर्यात, आरओडीटीईपी और निर्यात क्लस्टर
- विश्वास-आधारित अनुपालन और ई-कॉमर्स निर्यात भी इसमें शामिल हैं
परिचय एवं संदर्भ
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार १९९१ से भारत के आर्थिक परिवर्तन की धुरी रहा है, क्योंकि उदारीकरण के बाद भारत ने लाइसेंस राज की बंद अर्थव्यवस्था से निकलकर वैश्विक व्यापार और पूंजी प्रवाह से जुड़ा रास्ता अपनाया। विषय २६ में चार परस्पर जुड़े क्षेत्र हैं: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का सिद्धांत और व्यवहार, भारत के भुगतान संतुलन के उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेश प्रवाह (एफडीआई और एफपीआई), और विदेशी सहायता।
यह विगत-वर्ष प्रश्न आवृत्ति में स्तर ४ विषय है (५ में से केवल २ हालिया परीक्षाओं में आया), लेकिन २०२६ के लिए उच्च संभावना है। २०२१ (जब यह अंतिम बार आया था) के बाद से कई प्रमुख घटनाएँ हुई हैं: भारत सबसे बड़े प्रेषण प्राप्तकर्ता के रूप में उभरा, रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार, यूएई/ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौते, आरसेप निकास निहितार्थ, और २ खरब अमेरिकी डॉलर निर्यात लक्ष्य।
२०२६ के लिए क्या तैयार करें
- भुगतान संतुलन के घटक और संरचना
- एफडीआई बनाम एफपीआई का अंतर
- चालू खाता घाटे का डेटा
- भारत के शीर्ष निर्यात/आयात
- विदेशी मुद्रा भंडार
- विदेशी सहायता के लिए एक्ज़िम बैंक/ऋण सीमा ढाँचा
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M FDI और FII/FPI में अंतर बताओ। भारत के लिए कौन अधिक लाभकारी है?
आदर्श उत्तर
FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रबंधन नियंत्रण (≥10% इक्विटी) वाला दीर्घकालिक सामरिक निवेश है — प्रौद्योगिकी, रोजगार और स्थिर पूंजी लाता है (जैसे Apple/Samsung फोन निर्माण)। FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) बिना प्रबंधन नियंत्रण के शेयर/बॉन्ड में अल्पकालिक निवेश है — अस्थिर "हॉट मनी" जो अचानक निकल सकती है। FDI अधिक फायदेमंद है: यह उत्पादक क्षमता बनाता है, प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करता है और रोजगार सृजित करता है, जबकि FPI मुख्यतः शेयर बाजार तरलता देता है।
~50 शब्द • 5 अंक
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