केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जनवरी 2026 को गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। 11,000 वर्ग मीटर में 362 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस बहु-स्तरीय सुविधा में BSL-4, BSL-3 और BSL-2 मॉड्यूल के साथ-साथ ABSL-3 और ABSL-4 (एनिमल बायोसेफ्टी लेवल) मॉड्यूल भी होंगे। BSL-4 प्रयोगशालाएँ जैव-सुरक्षा के सर्वोच्च स्तर वाली अनुसंधान सुविधाएँ हैं, जहाँ एयरोसोल से फैलने वाले और जिनकी कोई ज्ञात वैक्सीन या उपचार नहीं है, ऐसे खतरनाक रोगजनकों — जैसे इबोला, मारबर्ग और निपाह वायरस — का अध्ययन किया जाता है। भारत के पास पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) जैसी केंद्रीय-वित्तपोषित सुविधाएँ पहले से हैं, लेकिन गुजरात की यह सुविधा पहली बार किसी राज्य सरकार द्वारा ऐसी बुनियादी संरचना के वित्तपोषण और प्रबंधन का उदाहरण है। COVID-19 महामारी से मिले सबकों के आधार पर 2022 के मध्य में इस सुविधा की योजना बनाई गई थी। यह सुविधा भारत के 'वन हेल्थ' ढाँचे के अनुरूप है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की परस्पर संबद्ध प्रकृति को मान्यता देती है।
गुजरात में भारत की पहली राज्य सरकार से वित्तपोषित BSL-4 बायो-कंटेनमेंट प्रयोगशाला की आधारशिला रखी गई: 'वन हेल्थ' ढाँचे के तहत महामारी से निपटने की तैयारी की दिशा में मील का पत्थर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जनवरी 2026 को गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) में भारत की पहली राज्य सरकार से वित्तपोषित बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। 11,000 वर्ग मीटर में 362 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस बहु-स्तरीय सुविधा में BSL-4, BSL-3 और BSL-2 मॉड्यूल के साथ-साथ ABSL-3 और ABSL-4 (एनिमल बायोसेफ्टी लेवल) मॉड्यूल भी होंगे। BSL-4 प्रयोगशालाएँ अत्यधिक नियंत्रण वाली अनुसंधान सुविधाएँ होती हैं, जिनका उपयोग उन खतरनाक रोगजनकों — जैसे इबोला, मारबर्ग और निपाह वायरस — के अध्ययन के लिए किया जाता है, जो एयरोसोल से फैल सकते हैं और जिनके लिए कोई ज्ञात वैक्सीन या उपचार नहीं है। भारत में पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) जैसी केंद्र से वित्तपोषित सुविधाएँ पहले से हैं, लेकिन गुजरात की यह सुविधा पहली बार किसी राज्य सरकार द्वारा ऐसी बुनियादी संरचना के वित्तपोषण और प्रबंधन का उदाहरण है। COVID-19 महामारी से मिले सबकों के आधार पर 2022 के मध्य में इस सुविधा की योजना बनाई गई थी। यह सुविधा भारत के 'वन हेल्थ' ढाँचे के अनुरूप है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के आपसी संबंध को मानता है।
मुख्य तथ्य
- अमित शाह ने 13 जनवरी 2026 को GBRC, गांधीनगर में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 लैब की आधारशिला रखी।
- ₹362 करोड़ की यह सुविधा 11,000 वर्ग मीटर में BSL-4, BSL-3 और BSL-2 मॉड्यूल शामिल करेगी।
- BSL-4 लैब इबोला, मारबर्ग और निपाह जैसे सबसे खतरनाक रोगजनकों पर शोध करती है।
- भारत में ऐसी एकमात्र दूसरी उच्च-सुरक्षा सुविधा केंद्र सरकार से वित्तपोषित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे है।
- COVID-19 महामारी के सबक से प्रेरित होकर 2022 के मध्य में योजना शुरू हुई।
- यह सुविधा मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत करने वाले 'वन हेल्थ' ढाँचे के अनुरूप है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: महामारी तैयारी के लिए 'वन हेल्थ' ढाँचे के अंतर्गत भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बी॰एस॰एल॰-चार प्रयोगशाला के रणनीतिक महत्व की जांच कीजिए। उत्तर (50 शब्द): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जनवरी 2026 को गांधीनगर स्थित गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र में आधारशिला रखी। ग्यारह हजार वर्ग मीटर में तीन सौ बासठ करोड़ रुपये की बहु-स्तरीय सुविधा में बी॰एस॰एल॰-चार, बी॰एस॰एल॰-तीन, बी॰एस॰एल॰-दो तथा पशु जैव-सुरक्षा मॉड्यूल एकीकृत होंगे और यह इबोला, मारबर्ग, निपाह रोगजनकों का अध्ययन संभव करेगी।
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जिस गुजरात बीएसएल-4 जैव-नियंत्रण प्रयोगशाला की आधारशिला 16 जनवरी 2026 को रखी गई, उसकी अनुमानित लागत क्या है?
लेख में उल्लेख है कि यह सुविधा 11,000 वर्ग मीटर में 362 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित की जाएगी।
स्रोत: PIB / DD News
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला क्या है और इसका क्या महत्व है?
BSL-4 प्रयोगशाला जैव सुरक्षा नियंत्रण की सर्वोच्च स्तर की सुविधा होती है। यह इबोला, मारबर्ग और निपाह जैसे सबसे खतरनाक रोगजनकों पर शोध के लिए बनाई जाती है, जिनका कोई ज्ञात टीका या उपचार नहीं है। ऐसी प्रयोगशालाएं घातक रोगजनकों के आकस्मिक प्रसार को रोकने के लिए वायुरोधी सूट, बहु-स्तरीय नियंत्रण और कड़े विसंदूषण प्रोटोकॉल का उपयोग करती हैं।
भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला की आधारशिला कहाँ और कब रखी गई?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जनवरी 2026 को गांधीनगर, गुजरात स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) में भारत की पहली राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। इस प्रयोगशाला की अनुमानित लागत ₹362 करोड़ है और यह 11,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली होगी।
GBRC BSL-4 प्रयोगशाला में कौन-कौन से मॉड्यूल होंगे और भारत की दूसरी उच्च जैव-सुरक्षा प्रयोगशाला कौन-सी है?
GBRC प्रयोगशाला एक बहु-स्तरीय संरचना होगी, जिसमें BSL-4, BSL-3 और BSL-2 मॉड्यूल के साथ-साथ ABSL-3 और ABSL-4 (एनिमल बायोसेफ्टी लेवल) मॉड्यूल भी होंगे। भारत की ऐसी एकमात्र अन्य उच्च जैव-सुरक्षा प्रयोगशाला पुणे स्थित केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान है।
'वन हेल्थ' ढाँचा क्या है और BSL-4 लैब इससे किस प्रकार जुड़ी है?
'वन हेल्थ' ढाँचा एक एकीकृत दृष्टिकोण है, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को परस्पर जुड़ा माना जाता है। GBRC BSL-4 प्रयोगशाला में मानव और पशु, दोनों के लिए बायोसेफ्टी मॉड्यूल (ABSL-3 और ABSL-4) होंगे, इसलिए यह इस ढाँचे के अनुरूप है।
भारत की पहली राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला की योजना बनाने का क्या कारण था?
भारत की पहली राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला की योजना 2022 के मध्य में शुरू हुई, जो मुख्यतः COVID-19 महामारी से मिले सबक से प्रेरित थी। महामारी ने यह बताया कि उभरती संक्रामक बीमारियों पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए उच्च जैव-सुरक्षा अनुसंधान अवसंरचना आवश्यक है।
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