प्रकाशित: 18 सितंबर 2025टॉपिक
भारत ने सारनाथ को 2025-26 चक्र के तहत UNESCO विश्व धरोहर सूची में नामांकित किया
भारत ने उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को 2025-26 के नामांकन चक्र में UNESCO विश्व धरोहर सूची के लिए आधिकारिक रूप से नामांकित किया है। इससे अस्थायी सूची में सारनाथ का 27 साल का इंतज़ार खत्म हुआ। सारनाथ में ही गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश, धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त, दिया था।
मुख्य स्मारकों में धमेक स्तूप (लगभग 500 ईस्वी) और अशोक स्तंभ शामिल हैं। माना जाता है कि बुद्ध ने पहला उपदेश ठीक उसी स्थान पर दिया था जहाँ धमेक स्तूप है। अशोक स्तंभ के शीर्ष पर मूल रूप से सिंह शीर्ष था, जो अब भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई पट्टिका लगाकर पहले के ब्रिटिश श्रेय को बदलेगा और स्थानीय शासक बाबू जगत सिंह (1787-88) को सारनाथ का पुरातात्विक महत्व सामने लाने का श्रेय देगा। UNESCO के मूल्यांकन दल ने सितंबर 2025 के अंत में सारनाथ का दौरा किया।
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सारनाथ में कौन-सी प्राचीन संरचना बुद्ध के पहले उपदेश के सटीक स्थान की पहचान कराती है?
व्याख्या · सही उत्तर Cसारनाथ में धामेक स्तूप (लगभग 500 ईस्वी) वह स्थान चिह्नित करता है जहां बुद्ध ने पहला उपदेश (धम्मचक्कप्पवत्तन) दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025-26 में UNESCO विश्व धरोहर सूची के लिए भारत ने सारनाथ का क्या नामांकन किया?
भारत ने 2025-26 के नामांकन चक्र में वाराणसी के पास स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची के लिए आधिकारिक रूप से नामांकित किया।
बौद्ध धर्म और भारतीय विरासत के लिए सारनाथ का क्या महत्व है?
सारनाथ में ही गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश, धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त, दिया था।
सारनाथ कहाँ स्थित है और इसके मुख्य पुरातात्विक स्मारक कौन-से हैं?
सारनाथ उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास स्थित है। इसके मुख्य पुरातात्विक स्मारकों में धमेक स्तूप (लगभग 500 ईस्वी), अशोक स्तंभ और बौद्ध मठ शामिल हैं।
सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर दर्जे के लिए नामांकित करने की प्रक्रिया क्या है?
भारत नामांकन दस्तावेज़ UNESCO को सौंपता है। इसके बाद विश्व धरोहर समिति के निर्णय से पहले अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद (ICOMOS) उस स्थल का मूल्यांकन करती है।
बोधगया, सांची और सारनाथ की UNESCO स्थिति क्या है?
बोधगया और सांची भारत में पहले से मौजूद बौद्ध UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं। सारनाथ को नामांकित किया गया है और उसे दर्जा मिलने पर इस बौद्ध विरासत में एक और स्थल जुड़ सकता है।