प्रकाशित: 3 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअंतरराष्ट्रीय
भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष 4–10 फरवरी को श्रीलंका में प्रदर्शित; भारत की सांस्कृतिक कूटनीति
4–10 फरवरी 2026 को भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों को कोलंबो, श्रीलंका के गंगाराम मंदिर में प्रदर्शित किया गया — यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण कदम था। ये अवशेष सामान्यतः गुजरात के वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में रखे हुए हैं और इन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका ले जाया गया। सप्ताह भर की प्रदर्शनी के दौरान 10 लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए और 11 फरवरी 2026 को अवशेष भारत वापस आए।
देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल गुजरात के अरावली जिले में शामलाजी के पास स्थित है। 1957 में पुरातत्वविद् प्रो. एस.एन. चौधरी द्वारा किए गए उत्खनन में हरे शिस्ट से बनी एक अवशेष पेटी मिली, जिस पर 'दशबल शरीर निलय' (बुद्ध के शारीरिक अवशेष का निवास) अंकित है। इसमें पवित्र राख युक्त एक तांबे का बक्सा मिला।
यह प्रदर्शनी भारत-श्रीलंका के सभ्यतागत और कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा है। राजस्थान के संदर्भ में बैराठ (विराटनगर) से अशोक के शिलालेख मिले हैं, जो प्रदेश की बौद्ध विरासत को दर्शाते हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: फरवरी 2026 के देवनीमोरी अवशेष प्रदर्शन के आधार पर भारत-श्रीलंका संबंधों में बौद्ध सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका का परीक्षण करें।
उत्तर (50 शब्द):
4–10 फरवरी 2026 तक गुजरात के अरावली जिले के देवनीमोरी बुद्ध अवशेष कोलंबो के गंगाराम मंदिर में प्रदर्शित हुए, जहां 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े। 1957 में उत्खनित तथा वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में संरक्षित ये अवशेष श्रीलंका के साथ बौद्ध विरासत से जुड़ी कूटनीति और सभ्यतागत संबंधों को गहरा करते हैं।
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जुड़ा प्रश्नआसान
फरवरी 2026 में भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष किस देश में प्रदर्शित किए गए?
व्याख्या · सही उत्तर Cभारत की सांस्कृतिक कूटनीति के तहत भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष 4-10 फरवरी 2026 तक श्रीलंका में प्रदर्शित किए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देवनीमोरी अवशेष क्या हैं, कहाँ खोजे गए और किस काल के हैं?
देवनीमोरी अवशेष भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष हैं, जो गुजरात के अरावली जिले में चौथी शताब्दी के स्तूप से खोजे गए। इन्हें भारत की सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध कलाकृतियों में माना जाता है और बड़ौदा संग्रहालय में संरक्षित रखा गया है।
देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका में कहाँ और कब प्रदर्शित किए गए और कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए?
देवनीमोरी अवशेष 4–10 फरवरी 2026 को श्रीलंका के गंगाराम मंदिर में प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो श्रीलंका में एक बड़ा सार्वजनिक धार्मिक आयोजन था।
भारत-श्रीलंका संबंधों के लिए देवनीमोरी अवशेष प्रदर्शनी का क्या महत्व है?
श्रीलंका में देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी भारत की बौद्ध सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रमुख कदम था। इसका उद्देश्य साझा बौद्ध विरासत के ज़रिए श्रीलंका के साथ सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करना था।
बौद्ध कूटनीति क्या है और भारत अपनी विदेश नीति में इसका उपयोग कैसे कर रहा है?
बौद्ध कूटनीति साझा बौद्ध विरासत को सॉफ्ट पावर के रूप में इस्तेमाल करके उन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की नीति है जहाँ बौद्ध आबादी बड़ी संख्या में है। भारत ने यह रणनीति श्रीलंका, थाईलैंड, जापान और अन्य एशियाई देशों के साथ अपनाई है।
देवनीमोरी अवशेष गुजरात के किस जिले से हैं?
देवनीमोरी अवशेष गुजरात के अरावली जिले से हैं। ये चौथी शताब्दी के बौद्ध स्तूप स्थल पर खोजे गए थे और भारत की महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर माने जाते हैं।