विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण रोज़गार गारंटी ढाँचे से जुड़ा कानून है और इसकी प्रकाशन तारीख 23 दिसंबर 2025 है। इसके तहत मनरेगा की जगह एक नए ग्रामीण रोज़गार गारंटी ढाँचे की बात की गई है और ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक रोज़गार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यह बदलाव सीधे ग्रामीण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की जवाबदेही से जुड़ता है, इसलिए यह सामान्य अध्ययन में शासन और भारतीय संविधान से जुड़े विषयों के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षा की दृष्टि से इस अपडेट में तीन बातें साफ रखनी चाहिए। पहली, पुराने ढाँचे के रूप में मनरेगा का संदर्भ आता है। दूसरी, नई व्यवस्था में गारंटी वाले दिनों की संख्या 125 है, जो पहले 100 दिन थी। तीसरी, अधिनियम का घोषित उद्देश्य ग्रामीण रोज़गार गारंटी ढाँचे को मजबूत करना और जवाबदेही तथा पारदर्शिता के बेहतर प्रावधान जोड़ना है। इसलिए इसे केवल योजना के नाम की तरह याद करने के बजाय नीति के क्रियान्वयन, लाभार्थी परिवारों और प्रशासनिक निगरानी के संदर्भ में पढ़ना चाहिए।

स्टैटिक जीके से इसका जुड़ाव ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं, रोज़गार गारंटी और शासन सुधार जैसे विषयों से बनता है। प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्न पुराने और नए प्रावधानों की तुलना, 100 से 125 दिन की वृद्धि, और मनरेगा के स्थान पर नए अधिनियम की पहचान पर आ सकता है। मुख्य परीक्षा में इसे ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्तर में ये मुख्य तथ्य साफ रखें: अधिनियम का वर्ष 2025, मनरेगा की जगह नया ढाँचा, 125 दिन की वार्षिक गारंटी, और जवाबदेही-पारदर्शिता पर ज़ोर।