प्रकाशित: 10 नवंबर 2025India TVराजस्थान
अभ्यास त्रिशूल: भारतीय सशस्त्र बलों ने राजस्थान के थार मरुस्थल में तीनों सेनाओं का सबसे बड़ा अभ्यास किया
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने 11 नवंबर 2025 को जैसलमेर, राजस्थान में अभ्यास मरु ज्वाला आयोजित किया। यह उस समय चल रहे त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल (TSE-2025) का हिस्सा था। त्रिशूल 3-13 नवंबर 2025 तक भारत की पश्चिमी सीमा पर चला।
अभ्यास में 30,000+ सैनिक, नौसेना के 25 युद्धपोत व पनडुब्बियाँ, वायुसेना के 40 विमान और अर्धसैनिक बल शामिल थे। मरु ज्वाला XXI स्ट्राइक कोर की 36वीं इन्फैंट्री डिवीज़न ने किया। 603वीं एविएशन ब्रिगेड ने मशीनीकृत गठनों के साथ टोही और निकट वायु सहायता दी।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की बहु-क्षेत्रीय एकीकृत रक्षा क्षमता के लिए राजस्थान के थार मरुस्थल में आयोजित अभ्यास त्रिशूल के महत्व का मूल्यांकन कीजिए। उत्तर (50 शब्द): तीनों सेनाओं का अभ्यास त्रिशूल तीन से तेरह नवंबर दो हजार पच्चीस तक भारत की पश्चिमी सीमा पर चला। इसमें सेना के तीस हजार से अधिक सैनिक, नौसेना के पच्चीस युद्धपोत और पनडुब्बियां, वायुसेना के चालीस विमान तथा अर्धसैनिक बल शामिल थे। जैसलमेर में छत्तीसवीं पैदल डिवीजन द्वारा मरु ज्वाला ने थल, जल और वायु के एकीकृत संचालन की क्षमता परखी।
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अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी रूपरेखा कितने वर्षों के लिए मान्य है?
व्याख्या · सही उत्तर Aभारत-अमेरिका रक्षा फ्रेमवर्क 10 वर्षों में नवीनीकृत होता है; 2005 में पहली बार, 2015 और 2025 में नवीनीकृत।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दक्षिणी कमान ने अभ्यास मरु ज्वाला कहाँ और कब किया?
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने 11 नवंबर 2025 को जैसलमेर, राजस्थान में अभ्यास मरु ज्वाला किया। यह चल रहे त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल का हिस्सा था।
त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल कब चला और कहाँ आयोजित हुआ?
त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल, यानी TSE-2025, 3-13 नवंबर 2025 तक भारत की पश्चिमी सीमा पर चला।
अभ्यास त्रिशूल में कौन-कौन से बल और सैन्य साधन शामिल थे?
अभ्यास त्रिशूल में भारतीय सेना के 30,000 से अधिक सैनिक, भारतीय नौसेना के 25 युद्धपोत और पनडुब्बियां, भारतीय वायुसेना के 40 विमान और अर्धसैनिक बल शामिल थे।
मरु ज्वाला से कौन सी इकाइयां और विमानन साधन जुड़े थे, और अभ्यास में क्या परखा गया?
मरु ज्वाला XXI स्ट्राइक कोर की 36वीं पैदल सेना डिवीजन ने किया, जबकि 603वीं विमानन ब्रिगेड के रोटरी विमानन साधनों ने मशीनीकृत गठनों के साथ टोही और निकट वायु सहायता की। अभ्यास में थल, समुद्र और वायु में बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियानों को परखा गया।